Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

सिद्धार्थनगर में नकली अंग्रेजी शराब के बड़े नेटवर्क का खुलासा, डबल डेकर बस से 35,740 नकली ढक्कन और 4,900 QR कोड बरामद; तीन गिरफ्तार
सिद्धार्थनगर, 10 अगस्त 2026। जनपद सिद्धार्थनगर में अवैध एवं नकली अंग्रेजी शराब के कारोबार के खिलाफ पुलिस, एसओजी और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली है। थाना बाँसी पुलिस, जनपदीय एसओजी, सर्विलांस सेल एवं आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई में डबल डेकर स्लीपर बस से भारी मात्रा में नकली अंग्रेजी शराब तैयार करने और उसे असली ब्रांड के नाम पर बाजार में खपाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई है। संयुक्त टीम ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, बरामद सामग्री में विभिन्न नामी अंग्रेजी शराब कंपनियों के 35,740 नकली ढक्कन, 4,900 QR कोड वाले सील रैपर, हरियाणा निर्मित 281 बोतल अंग्रेजी शराब, 20 लीटर स्प्रिट अल्कोहल, शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाले सेंट की छह शीशियां, 65 नई खाली बोतलें और तीन मोबाइल फोन शामिल हैं। इसके अलावा अवैध कारोबार में इस्तेमाल की जा रही डबल डेकर स्लीपर बस संख्या UP 17 AT 6415 को भी पुलिस ने कब्जे में लिया है।
पुलिस की इस कार्रवाई को नकली एवं मिश्रित अंग्रेजी शराब के अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। बरामद भारी मात्रा में नकली ढक्कन और QR कोड इस बात की ओर संकेत करते हैं कि अवैध शराब को नामी ब्रांड की असली शराब के रूप में बाजार में खपाने की तैयारी की जा रही थी। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
बाँसी-डुमरियागंज मार्ग पर चेकिंग के दौरान पकड़ी गई डबल डेकर बस
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर डॉ. अभिषेक महाजन के निर्देशन में जनपद में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी बाँसी शुभेन्दु कुमार के कुशल पर्यवेक्षण में थाना बाँसी पुलिस, एसओजी तथा आबकारी विभाग की संयुक्त टीम को संदिग्ध गतिविधियों के संबंध में सूचना मिली थी।
प्राप्त सूचना के आधार पर 09/10 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि को संयुक्त टीम ने बाँसी-डुमरियागंज मार्ग पर प्रतापपुर के पास प्रभावी चेकिंग शुरू की। इसी दौरान टीम ने डबल डेकर स्लीपर बस संख्या UP 17 AT 6415 को रोककर उसकी तलाशी ली।
बस की तलाशी शुरू होते ही पुलिस टीम को बड़ी मात्रा में ऐसी सामग्री बरामद हुई, जिसका इस्तेमाल नकली अथवा मिश्रित अंग्रेजी शराब तैयार करने और उसे असली ब्रांड की शराब के रूप में प्रस्तुत करने में किया जा सकता था। तलाशी के दौरान बस में मौजूद तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
बस से बरामद हुई नामी कंपनियों के नकली ढक्कनों की बड़ी खेप
पुलिस के मुताबिक बस से सबसे बड़ी बरामदगी 35,740 नकली अंग्रेजी शराब के ढक्कनों की हुई है। इन ढक्कनों पर IB, Old Monk, RS, Iconic, BP और McDowell’s जैसी शराब कंपनियों के नाम से संबंधित ढक्कन शामिल हैं।
इसके अलावा 4,900 QR कोड वाले सील रैपर भी बरामद किए गए। पुलिस की प्रारंभिक जांच में इन सामग्रियों का इस्तेमाल नकली या मिश्रित शराब को नामी ब्रांड की बोतलों में भरकर उसे असली उत्पाद के तौर पर पेश करने के लिए किए जाने की आशंका जताई गई है।
इतनी बड़ी संख्या में नकली ढक्कन और QR कोड की बरामदगी ने अवैध शराब कारोबार के संभावित नेटवर्क को लेकर जांच को और गंभीर बना दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये नकली ढक्कन और सील रैपर कहां तैयार किए जाते थे, इन्हें किससे खरीदा जाता था और किन-किन क्षेत्रों में इनका इस्तेमाल किया जाना था।
हरियाणा निर्मित 281 बोतल अंग्रेजी शराब भी बरामद
संयुक्त टीम को बस की तलाशी में हरियाणा प्रदेश की 281 बोतल अंग्रेजी शराब भी मिली। बरामद शराब OC Blue और RS कंपनी की 375 मिलीलीटर क्षमता वाली बोतलों में थी।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि हरियाणा से अपेक्षाकृत कम कीमत पर शराब लाकर दूसरे राज्यों और जनपदों में अधिक कीमत पर बेचने की योजना बनाई गई थी। इसी क्रम में हरियाणा निर्मित शराब को दूसरे अवैध शराब निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री के साथ ले जाया जा रहा था।
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि बरामद शराब की खेप किस स्थान से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था।
20 लीटर स्प्रिट और शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाला सेंट बरामद
तलाशी के दौरान पुलिस ने 20 लीटर स्प्रिट अल्कोहल भी बरामद किया। इसके साथ ही शराब बनाने में प्रयुक्त होने वाले सेंट की छह शीशियां भी मिलीं।
इसके अलावा RS, IB और Iconic कंपनियों की 65 नई खाली बोतलें बरामद की गई हैं। पुलिस के मुताबिक खाली बोतलें, नकली ढक्कन, QR कोड वाले सील रैपर, स्प्रिट और सेंट जैसी सामग्री की एक साथ बरामदगी अवैध शराब तैयार करने और उसकी पैकिंग से जुड़े नेटवर्क की जांच के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जांच टीम अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद सामग्री का इस्तेमाल किस स्थान पर और किस स्तर पर किया जाना था तथा इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
तीन आरोपी गिरफ्तार, अलग-अलग राज्यों और जनपदों से जुड़ा है कनेक्शन
संयुक्त टीम ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राम प्रताप प्रजापति उर्फ गुरु प्रजापति, दीपक जायसवाल और जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के रूप में हुई है।
राम प्रताप प्रजापति उर्फ गुरु प्रजापति
राम प्रताप प्रजापति उर्फ गुरु प्रजापति पुत्र स्वर्गीय बल्ली प्रजापति, निवासी जंगल एकला नंबर-2, टोला बेनीगंज, थाना गुलरिया, जनपद गोरखपुर का रहने वाला है।
पुलिस के अनुसार राम प्रताप थाना बाँसी में पहले से दर्ज मु0अ0सं0 146/2026, धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस तथा धारा 60/64 आबकारी अधिनियम में वांछित अभियुक्त था।
दीपक जायसवाल
दीपक जायसवाल पुत्र राजेंद्र जायसवाल, निवासी B-1/17-182, भरत बिहार, राजापुरी, थाना डाबरी मोड़, जिला उत्तम नगर, नई दिल्ली का निवासी है।
पुलिस पूछताछ में दीपक ने अवैध शराब के कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी है, जिसके आधार पर जांच टीम नेटवर्क की अन्य कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।
जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव
जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव पुत्र स्वर्गीय शिव सागर लाल श्रीवास्तव, निवासी लाला फरेंदिया, थाना महुली, जनपद संतकबीरनगर का रहने वाला है।
पुलिस के अनुसार जितेंद्र का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ थाना ढेबरुआ में मु0अ0सं0 69/22120-B, 467, 468, 471 BNS, 63बी कॉपीराइट एक्ट तथा 60, 64, 72 आबकारी अधिनियम से संबंधित मामला दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
पूछताछ में सामने आई अवैध शराब के नेटवर्क की कहानी
गिरफ्तार अभियुक्त दीपक जायसवाल से पुलिस ने विस्तृत पूछताछ की। पूछताछ में दीपक ने बताया कि वह पूर्व में गांजा तस्करी के एक मामले में जनपद देवरिया जेल में अभियुक्त प्रमोद यादव के साथ निरुद्ध रहा था।
पुलिस के मुताबिक जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद प्रमोद यादव के माध्यम से दीपक की पहचान गोरखपुर निवासी जितेंद्र जायसवाल से हुई। इसके बाद जितेंद्र के माध्यम से उसकी पहचान राम प्रताप उर्फ गुरु प्रजापति से हुई।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में यह बात सामने आई कि राम प्रताप उर्फ गुरु प्रजापति के माध्यम से अवैध शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाले नकली ढक्कन, स्प्रिट और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी। इन सामग्रियों को आसपास के जनपदों में बेचने का काम किया जाता था।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि बाद में दीपक ने हरियाणा से सस्ते दामों पर अंग्रेजी शराब खरीदकर दूसरे स्थानों पर अधिक कीमत में बेचने की योजना बनाई। इस कारोबार के जरिए अवैध आर्थिक लाभ कमाने का प्रयास किया जा रहा था।
मऊ, गोरखपुर और सिद्धार्थनगर होते हुए लखनऊ ले जाई जा रही थी सामग्री
पुलिस पूछताछ के अनुसार हरियाणा निर्मित अंग्रेजी शराब और शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को मऊ, गोरखपुर और सिद्धार्थनगर होते हुए लखनऊ ले जाया जा रहा था।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि बस्ती वाला रूट बंद होने के कारण उन्होंने फरेंदा होते हुए सिद्धार्थनगर की तरफ से लखनऊ जाने वाला रास्ता चुना था।
इसी दौरान डबल डेकर स्लीपर बस बाँसी-डुमरियागंज मार्ग पर प्रतापपुर के पास पहुंची, जहां पुलिस टीम ने सूचना के आधार पर चेकिंग के दौरान बस को रोक लिया। तलाशी में भारी मात्रा में अवैध सामग्री बरामद होने के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूर्व में भी जेल जा चुके हैं आरोपी
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ और उपलब्ध जानकारी से पता चला है कि गिरफ्तार तीनों आरोपी शराब एवं गांजा तस्करी से जुड़े मामलों में पूर्व में भी देवरिया, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर जनपदों में जेल जा चुके हैं।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के विस्तृत आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इनका संपर्क किन-किन लोगों से रहा है और अवैध शराब के इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग इनके साथ काम कर रहे थे।
नकली शराब के नेटवर्क में जुड़े अन्य लोगों की तलाश तेज
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अब नेटवर्क के अगले स्तर तक पहुंच गई है। पुलिस के मुताबिक बरामद मोबाइल फोन, नकली ढक्कन, QR कोड, शराब की बोतलें, स्प्रिट और अन्य सामग्री के आधार पर डिजिटल एवं भौतिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकली ढक्कन और QR कोड कहां से प्राप्त किए गए थे, इन्हें तैयार करने वाले लोग कौन हैं, शराब को किन स्थानों पर तैयार या मिश्रित किया जाता था और तैयार माल को किन बाजारों या जनपदों में पहुंचाया जाना था।
पुलिस का कहना है कि इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता के संबंध में साक्ष्य संकलित किए जा रहे हैं और गिरोह से जुड़े अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए प्रभावी प्रयास जारी हैं।
नकली शराब के कारोबार पर बड़ी चोट, जनहानि रोकने में भी महत्वपूर्ण कार्रवाई
पुलिस के अनुसार संयुक्त टीम की इस कार्रवाई से नकली अंग्रेजी शराब के निर्माण, भंडारण, पैकिंग और अवैध कारोबार से जुड़े गिरोह के महत्वपूर्ण सदस्यों तक पहुंचने में सफलता मिली है।
भारी मात्रा में नकली ढक्कन और QR कोड वाले सील रैपर बरामद होने से यह आशंका सामने आई है कि अवैध शराब को नामी ब्रांड की असली शराब के रूप में बाजार में खपाने की कोशिश की जा सकती थी। ऐसी गतिविधियों से न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, बल्कि वैध शराब कारोबार और सरकार के राजस्व को भी नुकसान पहुंचता है।
विशेष रूप से स्प्रिट, खाली बोतलें, सेंट, नकली ढक्कन और सील रैपर जैसी सामग्री का एक साथ मिलना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस की कार्रवाई से संभावित रूप से नकली या मिलावटी शराब को बाजार तक पहुंचने से पहले ही रोकने में सफलता मिली है।
20 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित की गई पुलिस टीम
इस प्रभावी कार्रवाई पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर डॉ. अभिषेक महाजन द्वारा कार्रवाई करने वाली संयुक्त टीम को 20,000 रुपये के नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और इस प्रकार के नेटवर्क से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ थाना बाँसी में मु0अ0सं0 148/26 के तहत धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) बीएनएस तथा धारा 60, 63, 72 आबकारी अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। मामले की विवेचना के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संयुक्त टीम ने की पूरी कार्रवाई
इस बड़ी कार्रवाई में थाना बाँसी, एसओजी, सर्विलांस सेल और आबकारी विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संयुक्त भूमिका रही।
कार्रवाई करने वाली टीम में मृत्युंजय पाठक, प्रभारी निरीक्षक थाना बाँसी, चन्द्रकान्त पाण्डेय, प्रभारी एसओजी सिद्धार्थनगर, आबकारी निरीक्षक दिनेश कुमार पासवान, आबकारी क्षेत्र द्वितीय बाँसी, मय हमराही तथा आबकारी निरीक्षक मोनी शुक्ला, आबकारी क्षेत्र-5 डुमरियागंज, मय हमराही शामिल रहे।
इसके अलावा हरेंद्र चौहान, प्रभारी सर्विलांस सेल सिद्धार्थनगर तथा एसओजी टीम के मुख्य आरक्षी राजीव शुक्ला, मनोज राय, मनिंद्र प्रताप चंद, दिलीप कुमार, आशुतोष धर द्विवेदी, आरक्षी वीरेन्द्र त्रिपाठी, रोहित चौहान, छविराज यादव, सत्येंद्र यादव एवं आरक्षी पुष्पेंद्र गौतम ने कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
थाना बाँसी टीम में उपनिरीक्षक रामप्रताप सिंह, शम्स जावेद खान, कांस्टेबल राजेश मौर्या एवं रिक्रूट कांस्टेबल विकास कुमार शामिल रहे।
बरामदगी का पूरा विवरण
संयुक्त टीम ने डबल डेकर बस की तलाशी के दौरान कुल मिलाकर निम्न सामग्री बरामद की—
- 35,740 नकली ढक्कन — IB, Old Monk, RS, Iconic, BP एवं McDowell’s कंपनी के।
- 4,900 QR कोड वाले सील रैपर।
- 281 बोतल अंग्रेजी शराब, हरियाणा प्रदेश निर्मित — OC Blue एवं RS कंपनी की, प्रत्येक 375 मिलीलीटर।
- 20 लीटर स्प्रिट अल्कोहल।
- शराब बनाने में प्रयुक्त सेंट की 06 शीशियां।
- 65 नई खाली बोतलें — RS, IB एवं Iconic कंपनी की।
- 01 डबल डेकर स्लीपर बस संख्या UP 17 AT 6415, जिसका इस्तेमाल घटना में किया जा रहा था।
- 03 मोबाइल फोन, विभिन्न कंपनियों के।
पुलिस द्वारा बरामद सभी सामग्री को कब्जे में लेकर मामले की विवेचना आगे बढ़ाई जा रही है।
पुलिस की जांच में अब कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे
इस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली ढक्कन और QR कोड कहां तैयार किए जा रहे थे और इनके पीछे कौन लोग काम कर रहे हैं। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि हरियाणा से लाई गई शराब को किस नेटवर्क के माध्यम से अन्य स्थानों तक पहुंचाया जाना था।
पुलिस बरामद मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के संपर्क में रहने वाले लोगों की जानकारी जुटा रही है। संभावित सप्लायर, खरीदार, परिवहन से जुड़े लोग और अवैध शराब की बिक्री करने वाले अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार इस मामले में अभी जांच जारी है और साक्ष्य के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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