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छात्रों के आंदोलन के आगे झुकी झारखंड सरकार, विवादित JSSC-CGL और TDPL परीक्षाएं रद; देवेंद्र नाथ महतो ने अनशन स्थगित किया
📍आंदोलन की खास बात, जहां कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन में पूरी बीजेपी की विरोधी पार्टियों आंदोलन को समर्थन कर रही थी और आंदोलन स्थल पर पहुंच रही थी, वहीं पर झारखंड में इंडिया गठबंधन की सरकार होने के कारण कोई नहीं पहुंचा……. यहां पर छात्रों नें स्वयं अपनी लड़ाई लड़ी.
रांची, 18 अगस्त 2026
झारखंड में विवादित प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन को बड़ी सफलता मिली है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL और TDPL की आयोजित परीक्षाओं को रद करने की घोषणा के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना आमरण अनशन स्थगित कर दिया है। देवेंद्र नाथ महतो ने सोमवार देर रात इसकी घोषणा करते हुए कहा कि 2 जुलाई से जारी उनका 16 दिवसीय आमरण अनशन अब समाप्त किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री से बैठक के बाद शुरू हुई CID जांच
देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि 20 जुलाई को मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक के बाद 28 जुलाई से मामले की CID जांच शुरू हुई थी। उनके अनुसार जांच में सख्ती बरती जा रही है और पूर्व मुख्य सचिव तथा JPSC अध्यक्ष जैसे उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी जांच के दायरे में लाया गया है।
परीक्षाओं को रद करने के सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए महतो ने कहा कि यह आसान निर्णय नहीं था, क्योंकि JSSC-CGL की भर्ती प्रक्रिया नियुक्ति के अंतिम चरण तक पहुंच चुकी थी। इसके बावजूद छात्रों के हित और मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है।
आंदोलन में साथ देने वालों का जताया आभार
अनशन समाप्त करने की घोषणा के दौरान देवेंद्र नाथ महतो ने आंदोलन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने झारखंड सरकार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मंत्री दीपिका पांडेय, विधायक इरफान अंसारी, छात्र समुदाय, मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया।
उन्होंने उन अनजान लोगों को भी याद किया, जो आंदोलन के दौरान देर रात एक-दो बजे तक प्रदर्शनकारियों के लिए पानी और नाश्ते की व्यवस्था करते रहे। महतो ने कहा कि आंदोलन को मजबूती देने में ऐसे लोगों के सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
CBI जांच की मांग पर अभी कायम हैं छात्र
सरकार की ओर से परीक्षाएं रद किए जाने के बावजूद छात्रों की ओर से CBI जांच की मांग अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आंदोलन से जुड़े छात्र नेताओं का कहना है कि परीक्षा रद होना संघर्ष की बड़ी जीत है, लेकिन कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना भी जरूरी है।
वहीं, विपक्ष की ओर से भी सरकार के फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने JSSC-CGL परीक्षा रद होने को छात्रों के संघर्ष की पहली जीत बताते हुए CBI जांच की मांग की है।
पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के लिए जारी रहेगी लड़ाई
अनशन स्थगित करने के साथ ही देवेंद्र नाथ महतो ने साफ किया कि उनका संघर्ष केवल मौजूदा परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी कल्पना ऐसी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था की है, जहां पेपर लीक और परीक्षा में धांधली की कोई जगह न हो।
उन्होंने कहा कि आज जो बच्चे प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ रहे हैं, जब वे भविष्य में JPSC या JSSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हों तो उन्हें अपने अधिकार के लिए इस तरह का संघर्ष और बलिदान न देना पड़े।
हर परीक्षा के लिए कड़ी निगरानी और ऑडिट की मांग
देवेंद्र नाथ महतो ने भविष्य में आयोजित होने वाली प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा की कड़ी निगरानी और स्वतंत्र ऑडिट की मांग की। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए और इसके लिए स्पष्ट प्रमाण-पत्र की व्यवस्था की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विधानसभा में नए कानून बनाने या संविधान में संशोधन तक की आवश्यकता पड़े तो उस दिशा में भी कदम उठाया जाना चाहिए।
इस तरह JSSC-CGL और TDPL परीक्षाओं को रद करने के फैसले के बाद झारखंड में छात्रों का लंबा आंदोलन फिलहाल एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार और जांच को लेकर छात्रों का संघर्ष आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।
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