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सीकर में अयोध्या साइबर क्राइम थाने के SI समेत चार पुलिसकर्मी रिश्वत लेते गिरफ्तार, ACB के जाल में फंसे
सीकर/अयोध्या | 19 अगस्त 2026
2.80 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए
उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। राजस्थान के सीकर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने अयोध्या साइबर क्राइम थाने में तैनात एक सब-इंस्पेक्टर और तीन कांस्टेबलों को 2.80 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मंगलवार को की गई।
ACB के अनुसार, मामला अयोध्या साइबर क्राइम थाने में दर्ज एक मुकदमे से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसके भाई का नाम मुकदमे से हटाने के एवज में पुलिसकर्मियों ने रिश्वत की मांग की थी। शुरुआती तौर पर कथित रूप से 4 लाख रुपये की मांग की गई थी, जिसके बाद सौदा 2.80 लाख रुपये में तय होने की बात सामने आई है।
शिकायत के सत्यापन के बाद ACB ने बिछाया जाल
शिकायत मिलने के बाद राजस्थान ACB की सीकर इकाई ने पहले रिश्वत की मांग का सत्यापन कराया। मांग की पुष्टि होने के बाद मंगलवार को ट्रैप कार्रवाई की गई। अयोध्या साइबर क्राइम थाने की टीम कथित रूप से रिश्वत की रकम लेने के लिए सीकर पहुंची थी।
ACB के मुताबिक, ट्रैप के दौरान कांस्टेबल सोहनलाल ने परिवादी से 2.80 लाख रुपये की रकम प्राप्त की, जबकि सब-इंस्पेक्टर यशवंत सिंह और कांस्टेबल पवन त्रिपाठी तथा गौरव चारग भी मौके पर मौजूद थे। रकम लेते ही ACB टीम ने कार्रवाई करते हुए चारों को गिरफ्तार कर लिया।
भागने की कोशिश में ACB की गाड़ी को मारी टक्कर
मामला यहीं नहीं रुका। रिपोर्टों के मुताबिक, ACB की कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने मौके से वाहन लेकर भागने का प्रयास किया। इस दौरान उनकी गाड़ी ने ACB की सरकारी गाड़ी को टक्कर मार दी। हालांकि, ACB टीम ने पीछा कर चारों पुलिसकर्मियों को पकड़ लिया।
अयोध्या SSP ने चारों को किया निलंबित
राजस्थान में गिरफ्तारी की जानकारी सामने आने के बाद अयोध्या पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। अयोध्या SSP डॉ. गौरव ग्रोवर ने चारों आरोपी पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
ACB ने आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है और रिश्वत मांगने से लेकर रकम लेने तक की पूरी कड़ी की पड़ताल की जा रही है।
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि कानून लागू कराने वाली एजेंसी के कुछ कर्मचारियों पर लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोप पूरी पुलिस व्यवस्था की छवि को किस तरह प्रभावित करते हैं। हालांकि, गिरफ्तार पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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