बहु चर्चित हत्याकांड में सपा के पूर्व एमएलसी सहित 10 को उम्र कैद की सजा…….

NGV PRAKASH NEWS

औरैया दोहरे हत्याकांड में छह साल बाद फैसला, पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत 10 दोषियों को उम्रकैद

औरैया | 19 अगस्त 2026

औरैया के बहुचर्चित अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे के दोहरे हत्याकांड में बुधवार को करीब छह साल बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने मामले में सपा के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई और पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक समेत 10 आरोपितों को हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। मामले का एक आरोपित नाबालिग है, जिसका मुकदमा किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है।

जमीन के विवाद से शुरू हुई थी रंजिश

पुलिस के अनुसार, इस दोहरे हत्याकांड की जड़ पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित करीब एक बीघा जमीन के विवाद से जुड़ी थी। इसी जमीन को लेकर कमलेश पाठक और अधिवक्ता मंजुल चौबे के बीच मतभेद लगातार बढ़ते गए। बताया जाता है कि कभी दोनों के बीच बेहद करीबी दोस्ती थी और वे राजनीतिक तथा सामाजिक गतिविधियों में साथ नजर आते थे, लेकिन समय के साथ दोनों के संबंधों में खटास आ गई।

जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे व्यक्तिगत और राजनीतिक रंजिश में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव के बाद यह विवाद इलाके में भी चर्चा का विषय बन गया था।

विवाद के दौरान हुई थी फायरिंग

पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन कमलेश पाठक मंदिर परिसर के पास जमीन पर कुर्सी डालकर बैठे थे। इसी दौरान मंजुल चौबे के पिता वहां पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर दोनों परिवारों के अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। कमलेश पाठक के भाई संतोष और रामू भी वहां पहुंचे।

आरोप है कि कहासुनी के बाद विवाद मारपीट तक पहुंच गया और इसी दौरान फायरिंग हुई। गोली लगने से अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे जमीन पर गिर पड़े। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। दोहरी हत्या की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।

घटना के बाद कमलेश पाठक, उनके भाइयों समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया था।

कभी बेहद करीबी दोस्त थे कमलेश पाठक और मंजुल चौबे

मंजुल चौबे और कमलेश पाठक के बीच कभी बेहद करीबी संबंध बताए जाते थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक समय मंजुल चौबे को कमलेश पाठक का बेहद करीबी माना जाता था।

मंजुल चौबे छात्र राजनीति से भी जुड़े रहे और तिलक महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए थे। बताया जाता है कि उस दौर में कमलेश पाठक ने उन्हें राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने में सहयोग किया था। हालांकि बाद में मंजुल चौबे की अपनी राजनीतिक पहचान बनने लगी और दोनों के बीच मतभेद सामने आने लगे।

वर्ष 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान दोनों के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ने की बात सामने आई। बाद में मंजुल चौबे भाजपा नेताओं के करीब होते गए, जबकि कमलेश पाठक सपा की राजनीति में सक्रिय रहे। इसी दौरान पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास जमीन का विवाद भी सामने आया और दोनों की पुरानी दोस्ती गहरी रंजिश में बदल गई।

कम उम्र में विधायक बनने के बाद एमएलसी तक पहुंचे थे कमलेश पाठक

कमलेश पाठक औरैया की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली रहे हैं। महज 28 वर्ष की उम्र में वह सपा के टिकट पर विधायक बने थे। इसके बाद उन्होंने मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वर्ष 1990 में वह विधान परिषद सदस्य रहे और 1991 में उन्हें दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बनाया गया। वर्ष 2002 में उन्होंने दिबियापुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर दोबारा विधायक का चुनाव जीता। हालांकि वर्ष 2007 में दिबियापुर और वर्ष 2012 में सिकंदरा विधानसभा सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

वर्ष 2013 में सपा सरकार ने उन्हें रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। इसके बाद वर्ष 2015 में सपा ने उन्हें दोबारा विधान परिषद भेजा और वह एमएलसी बने।

हत्याकांड के बाद गैंगस्टर एक्ट में भी हुई कार्रवाई

दोहरे हत्याकांड के बाद पुलिस और प्रशासन ने आरोपितों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी। प्रशासन ने कमलेश पाठक समेत अन्य आरोपितों की संपत्तियों को कार्रवाई के दायरे में लिया था।

बताया गया कि कार्रवाई के दौरान कमलेश पाठक की करीब 36.15 करोड़ रुपये, संतोष पाठक की करीब 9.75 करोड़ रुपये और रामू पाठक की करीब 7.51 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्ती की कार्रवाई में शामिल की गई थी।

छह साल चली सुनवाई के बाद आया फैसला

दोहरे हत्याकांड का मुकदमा करीब छह वर्षों तक अदालत में चला। इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से गवाह और साक्ष्य पेश किए गए। मामले में कई तारीखों पर सुनवाई हुई और दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित किया।

बुधवार को विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 10 आरोपितों को हत्या के मामले में दोषी करार दिया और सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं, नाबालिग आरोपित का मामला किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है।

छह साल पुराने इस चर्चित दोहरे हत्याकांड में अदालत का फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार ने न्याय मिलने की बात कही है। मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं पर आगे की प्रक्रिया जारी रहेगी।

NGV PRAKASH NEWS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *