वेश्यालय में ग्राहक बनकर जाने वाले पर नहीं चलेगा ITP एक्ट का केस-इलाहाबाद हाईकोर्ट…….

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वेश्यालय में ग्राहक बनकर जाने वाले पर नहीं चलेगा ITP एक्ट का केस, इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

प्रयागराज | 20 अगस्त 2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वेश्यालय में ग्राहक के रूप में जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 यानी Immoral Traffic (Prevention) Act—ITP Act की धाराओं के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ ग्राहक के तौर पर वेश्यालय जाने और निजी यौन संतुष्टि के लिए पैसे देने मात्र से व्यक्ति पर ITP Act की धारा 3, 4, 5 और 7 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

यह फैसला न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने 11 अगस्त 2026 को नितिन की ओर से दाखिल धारा 482 CrPC की याचिका पर सुनाया। मामला गाजियाबाद के शालीमार गार्डन थाना क्षेत्र का था। हाईकोर्ट ने नितिन के खिलाफ दाखिल चार्जशीट, समन आदेश और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

31 दिसंबर 2023 को वेश्यालय में पुलिस ने मारा था छापा

मामला 31 दिसंबर 2023 का है। पुलिस को सूचना मिली थी कि गाजियाबाद के शालीमार गार्डन क्षेत्र में डीएलएफ पुलिस चौकी के पास भोजपुरा क्रॉसिंग स्थित एक मकान में महिलाएं कथित तौर पर सेक्स ट्रेड में शामिल हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मकान पर छापा मारा।

पुलिस ने वहां से कुल 16 लोगों को पकड़ा, जिनमें नौ महिलाएं और सात पुरुष शामिल थे। पुलिस के अनुसार, महिलाओं ने पूछताछ में बताया कि वे सेक्स ट्रेड में शामिल थीं और अपनी कमाई में से मकान से जुड़े व्यक्ति को भी पैसा देती थीं। इसके बाद 31 दिसंबर 2023 को शालीमार गार्डन थाने में केस दर्ज किया गया।

जांच के बाद पुलिस ने नितिन समेत आरोपियों के खिलाफ ITP Act की धारा 3, 4, 5 और 7 के तहत चार्जशीट दाखिल की। 14 जनवरी 2024 को चार्जशीट दाखिल हुई और 25 अप्रैल 2024 को मजिस्ट्रेट ने मामले में संज्ञान लेते हुए समन जारी किया। इसके बाद नितिन ने हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट ने समझाया—इन धाराओं का दायरा क्या है?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ITP Act की संबंधित धाराओं के उद्देश्य और उनके कानूनी दायरे पर विस्तार से विचार किया।

धारा 3 मुख्य रूप से वेश्यालय को चलाने, उसका प्रबंधन करने या उसके संचालन में सहायता करने से संबंधित है। किसी मकान या परिसर को जानबूझकर वेश्यालय के रूप में इस्तेमाल करने देने की स्थिति भी इसके दायरे में आती है।

धारा 4 किसी अन्य व्यक्ति की वेश्यावृत्ति से होने वाली कमाई पर जानबूझकर निर्भर रहने से संबंधित है।

धारा 5 किसी व्यक्ति को वेश्यावृत्ति के लिए खरीदने, बहकाने, उकसाने या ले जाने जैसे कृत्यों से संबंधित है।

वहीं धारा 7 सार्वजनिक स्थानों या उनके आसपास वेश्यावृत्ति किए जाने से संबंधित परिस्थितियों में लागू होती है।

सिर्फ पैसे देकर यौन संतुष्टि लेना इन धाराओं के तहत अपराध नहीं

कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति केवल ग्राहक के रूप में वेश्यालय जाता है और पैसे देकर अपनी निजी यौन संतुष्टि प्राप्त करता है, तो महज इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि वह वेश्यावृत्ति के लिए किसी व्यक्ति की खरीद-फरोख्त, प्रबंधन या संचालन में शामिल था।

अदालत ने माना कि ITP Act में ‘prostitution’ की परिभाषा में व्यावसायिक उद्देश्य के लिए यौन शोषण या दुर्व्यवहार महत्वपूर्ण तत्व है। इसलिए किसी ग्राहक का केवल अपनी कामेच्छा की संतुष्टि के लिए पैसे देना अपने आप में धारा 3, 4, 5 या 7 के अपराध के तत्वों को पूरा नहीं करता।

कोर्ट ने इसी आधार पर कहा कि नितिन की भूमिका रिकॉर्ड के अनुसार महज एक ग्राहक की थी। उसके खिलाफ ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया जिससे यह साबित हो कि वह वेश्यालय चला रहा था, उसका प्रबंधन कर रहा था, किसी अन्य की वेश्यावृत्ति की कमाई पर निर्भर था अथवा किसी महिला को वेश्यावृत्ति के लिए उपलब्ध कराने या ले जाने में शामिल था।

कोर्ट ने पूरी आपराधिक कार्यवाही कर दी रद्द

हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर नितिन के खिलाफ ITP Act की धारा 3, 4, 5 और 7 के तहत अपराध बनता ही नहीं है। ऐसे में उसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

इसके बाद न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने नितिन के खिलाफ लंबित केस, 14 जनवरी 2024 की चार्जशीट और 25 अप्रैल 2024 के संज्ञान/समन आदेश को रद्द कर दिया।

यह पहली बार नहीं, पहले भी दे चुका है हाईकोर्ट ऐसी व्यवस्था

इस फैसले की खास बात यह है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसी कानूनी सवाल पर पहले भी समान रुख अपनाया है। 2024 में Dinesh Tiwari @ Dhirendra Kumar Tiwari बनाम State of U.P. मामले में अदालत ने कहा था कि केवल ग्राहक के रूप में वेश्यालय में मौजूद रहने से ITP Act की संबंधित धाराएं अपने आप लागू नहीं होतीं।

इसके बाद 2025 में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के अलग-अलग मामलों में यह बात दोहराई गई कि वेश्यालय में मिला ग्राहक तब तक धारा 3/4/5/7 के तहत आरोपी नहीं माना जा सकता, जब तक उसके खिलाफ वेश्यालय चलाने, प्रबंधन करने या वेश्यावृत्ति को किसी अन्य तरीके से संचालित अथवा सुविधाजनक बनाने की ठोस भूमिका सामने न आए।

फैसले का मतलब क्या है?

हाईकोर्ट के इस फैसले को इस रूप में नहीं समझा जाना चाहिए कि वेश्यावृत्ति से जुड़ी हर गतिविधि कानून के दायरे से बाहर हो गई है। अदालत ने सिर्फ यह स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति की भूमिका अगर रिकॉर्ड पर केवल ग्राहक के रूप में सामने आती है, तो संबंधित धाराओं के आवश्यक कानूनी तत्वों के बिना उस पर ITP Act की धारा 3, 4, 5 और 7 नहीं लगाई जा सकतीं।

अर्थात, वेश्यालय चलाने वाला, उसका प्रबंधन करने वाला, दूसरों की वेश्यावृत्ति की कमाई पर निर्भर रहने वाला या किसी व्यक्ति को वेश्यावृत्ति के लिए उपलब्ध कराने/ले जाने जैसे कृत्य में शामिल व्यक्ति इस फैसले का लाभ केवल ‘ग्राहक’ होने का दावा करके नहीं ले सकता। संबंधित भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून अलग-अलग तरीके से लागू हो सकता है।

नोट: यह खबर 11 अगस्त 2026 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के नितिन बनाम राज्य उत्तर प्रदेश मामले के फैसले और उपलब्ध न्यायिक रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है।

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