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हरैया तहसील में एसडीएम कोर्ट में हाई-वोल्टेज हंगामा, यूट्यूबर पत्रकार पर बदसलूकी के आरोप; वीडियो वायरल
बस्ती | 20 अगस्त 2026
बस्ती जिले की हरैया तहसील परिसर में एसडीएम कोर्ट के अंदर कथित तौर पर एक यूट्यूबर पत्रकार द्वारा हंगामा किए जाने का मामला सामने आया है। घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद तहसील परिसर में हुए कथित विवाद को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
चलती अदालत में पहुंचने को लेकर हुआ विवाद

बताया जा रहा है कि उप जिलाधिकारी हरैया अपनी अदालत में मुकदमों की नियमित सुनवाई कर रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति, जो स्वयं को पत्रकार और यूट्यूबर बता रहा था, कथित तौर पर एक मामले की पैरवी के सिलसिले में कोर्ट कक्ष में पहुंच गया।
आरोप है कि युवक ने मीडिया का प्रभाव दिखाते हुए न्यायिक कार्य के दौरान विवाद खड़ा किया और सुनवाई कर रहे एसडीएम से तीखी बहस करने लगा। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और कोर्ट कक्ष से लेकर तहसील परिसर तक कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
अधिवक्ताओं से भी हुई तीखी नोकझोंक
मामला बढ़ता देख मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं ने कथित तौर पर कोर्ट की कार्यवाही और न्यायालय की गरिमा बनाए रखने को लेकर विरोध किया। इसके बाद यूट्यूबर पत्रकार और अधिवक्ताओं के बीच भी तीखी नोकझोंक होने की बात सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोप है कि विवाद के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया और खुद को मीडिया से जुड़ा बड़ा चेहरा बताते हुए अधिवक्ताओं पर प्रभाव जमाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है।
वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल
घटना के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा बनाया गया वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में तहसील परिसर में विवाद और लोगों की मौजूदगी दिखाई दे रही है। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कार्रवाई पर टिकी नजर
मामले को लेकर अब प्रशासन की संभावित कार्रवाई पर नजर है। यदि जांच में न्यायिक कार्य में बाधा डालने, अभद्रता करने या अन्य किसी कानून का उल्लंघन किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
वहीं, किसी व्यक्ति को केवल उसके पत्रकार या यूट्यूबर होने के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। पूरे मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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