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सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत ढही, तीन की मौत; कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका
नई दिल्ली 6सितम्बर 2026।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक पांच मंजिला पीजी इमारत अचानक ढह गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मलबे में कई लोगों, विशेषकर छात्रों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक अब तक नौ बच्चों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया है, जबकि तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
दिल्ली के एडिशनल डीसीपी अभिमन्यु पोसवाल ने बताया कि बचाए गए एक बच्चे ने अंदर करीब 15 से 16 बच्चों के फंसे होने की जानकारी दी है, हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि बचाव दल पूरी सावधानी के साथ मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने में जुटे हैं।
पुलिस अधिकारी के अनुसार इमारत के मालिक की जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले में लापरवाही के आरोप में मुकदमा दर्ज किया जाएगा और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी।
बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम
दिल्ली पुलिस के मुताबिक स्थानीय पूछताछ में पता चला है कि यह इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी थी। इसमें बेसमेंट के अलावा पांच ऊपरी मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल पीजी हॉस्टल के रूप में किया जा रहा था। हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद बताया कि बेसमेंट में खुदाई का काम चल रहा था। उनके अनुसार इसी दौरान इमारत का एक पिलर प्रभावित हुआ और पूरी बिल्डिंग ढह गई। उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर आसपास की इमारतों को भी खाली कराया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय सरकार की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों की जान बचाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, चाहे वह इमारत का मालिक हो या कोई अधिकारी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
20 से 30 लोगों के हताहत होने की आशंका
दिल्ली सरकार की सेंट्रलाइज्ड एक्सिडेंट एंड ट्रॉमा सर्विसेज (कैट्स) के नोडल अधिकारी बलराज सिंह ने बताया कि शुरुआती जानकारी के आधार पर 20 से 30 लोगों के हताहत होने की आशंका है। घटनास्थल पर 17 एंबुलेंस तैनात की गई हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इमारत में बड़ी संख्या में छात्र रहते थे और आसपास की कई इमारतों में भी पीजी संचालित होते हैं। हादसे के बाद दमकल और बचाव दल ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए टीमें लगातार अभियान चला रही हैं।
एनडीआरएफ के आईजी एनएस बुंदेला ने बताया कि पांच मंजिला इमारत की ऊपरी मंजिलों से लोगों को बाहर निकालने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मलबे में जो लोग जीवित हैं, उन्हें सुरक्षित निकालना सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए राहत अभियान में समय लग सकता है।
राजनीतिक नेताओं ने जताया दुख
हादसे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें आपसी समन्वय के साथ बचाव अभियान चला रही हैं तथा घायलों को आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जा रही है। उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी घटना पर दुख जताते हुए कहा कि सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना बेहद दुखद है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
राहुल गांधी ने छात्रों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित हॉस्टल सुविधाओं की जरूरत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बेहतर हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में छात्र पीजी में रहने को मजबूर होते हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने भी आशंका जताई है कि मलबे में दिल्ली विश्वविद्यालय के कई छात्र फंसे हो सकते हैं। संगठन ने सभी छात्रों और अन्य लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने तथा हादसे की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की मांग की है।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन की टीमें मलबे को सावधानीपूर्वक हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। हादसे की वास्तविक वजह और कुल हताहतों की संख्या बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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