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बस्ती में ‘वोट बचाओ’ मार्च से सियासी सरगर्मी, महेंद्रनाथ यादव के नेतृत्व में सड़क पर उतरे सपा कार्यकर्ता
बस्ती, 07 अक्टूबर 2026.
लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर बुधवार को बस्ती की सड़कों पर समाजवादी पार्टी का बड़ा मार्च नजर आया। सपा जिलाध्यक्ष एवं बस्ती सदर विधायक महेंद्रनाथ यादव व विधायक कविन्द्र चौधरी अतुल के नेतृत्व में कटेश्वरपार्क स्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा से गांधी कला भवन स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक पैदल मार्च निकाला गया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतंत्र और मताधिकार की सुरक्षा के लिए जनजागरण अभियान का हिस्सा बताया।
मार्च में बड़ी संख्या में सपा नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। हाथों में तख्तियां लिए कार्यकर्ता ‘लोकतंत्र बचाओ, संविधान बचाओ, वोट बचाओ, देश बचाओ’ जैसे नारे लगाते हुए आगे बढ़े। प्रदर्शन के दौरान चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं को दूर करने की मांग उठाई गई। भीड़ और मार्च के चलते शहर के कुछ हिस्सों में यातायात भी प्रभावित हुआ।
अंबेडकर से गांधी प्रतिमा तक पहुंचा मार्च
मार्च की शुरुआत बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने से हुई और कार्यकर्ता गांधी कला भवन स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक पहुंचे। इस दौरान संविधान, लोकतांत्रिक अधिकार और मताधिकार से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए।
सपा नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान ‘वोट चोर’ जैसे नारे भी सुनाई दिए, जिन्हें सपा कार्यकर्ताओं ने अपने राजनीतिक विरोध के तौर पर इस्तेमाल किया।
अखिलेश यादव ने बस्ती के मार्च को सोशल मीडिया पर साझा किया
बस्ती में हुए इस कार्यक्रम को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर साझा किया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी की ओर से इन दिनों लोकतंत्र, मताधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदेश में अभियान चलाया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने बस्ती के कार्यक्रम को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा और PDA समाज के जागने की बात कही। उन्होंने अपने संदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की। उनके बयान में भाजपा के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष और PDA की भागीदारी को लेकर पार्टी का रुख सामने आया।
हाल के दिनों में अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं। 6 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के मुद्दे पर हुए विपक्षी प्रदर्शन के दौरान उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं।
महेंद्रनाथ यादव ने उठाया मताधिकार की सुरक्षा का मुद्दा
मार्च का नेतृत्व कर रहे सपा जिलाध्यक्ष एवं सदर विधायक महेंद्रनाथ यादव ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक के वोट की सुरक्षा और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
उन्होंने निर्वाचन व्यवस्था को लेकर जनता के बीच उठ रहे सवालों और आशंकाओं को गंभीरता से लिए जाने की मांग की। महेंद्रनाथ यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई।
उनका कहना था कि यदि जांच में संवैधानिक पद की गरिमा या निर्वाचन संबंधी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बस्ती में निकाले गए मार्च की अखिलेश यादव द्वारा सराहना किए जाने पर उनका आभार भी जताया।
सपा ने सड़क पर दिखाई संगठनात्मक ताकत
मार्च में विधायक राजेंद्र चौधरी, कविंद्र चौधरी ‘अतुल’, पूर्व विधायक राजमणि पांडेय, राजाराम यादव, राम जियावन, दया शंकर मिश्र समेत बड़ी संख्या में पार्टी नेता और कार्यकर्ता शामिल रहे।
कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को दूर करने, मताधिकार की सुरक्षा तथा निर्वाचन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की मांग उठाई। बस्ती में यह कार्यक्रम ऐसे समय हुआ है जब समाजवादी पार्टी जिले में बूथ और विधानसभा स्तर तक संगठन को सक्रिय करने के साथ लोकतंत्र एवं मताधिकार से जुड़े अभियान चला रही है।
इस मार्च ने एक ओर जहां सपा के स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता को सड़क पर प्रदर्शित किया, वहीं दूसरी ओर मतदाता सूची, चुनावी पारदर्शिता और निर्वाचन व्यवस्था को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को भी बस्ती के स्थानीय परिदृश्य में सामने ला दिया।
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