दसवीं पास करता था मजदूरी, फिर कुछ ऐसा हुआ कि अफसर भी ठोकने लगे सलामी

Gyan Prakash Dubey

दसवीं पास करता था मजदूरी, फिर कुछ ऐसा हुआ कि अफसर भी ठोकने लगे सलामी

गाजियाबाद, 1 जनवरी 2025।

झूठ का महल ज्यादा देर टिक नहीं पाता, लेकिन अनस मलिक ने इसे इतना चमकदार बनाया कि पुलिस को भी सलाम ठोकना पड़ा—कम से कम कुछ समय के लिए। गाजियाबाद पुलिस ने एक ऐसे शख्स को धर दबोचा है, जिसने सरकारी महकमे की रोबदार छवि उधार ली और खुद को ‘मानव अधिकार न्याय आयोग उत्तर प्रदेश’ का अध्यक्ष और ‘नीति आयोग’ का सदस्य बताकर लोगों को चकमा दिया।

मजदूर से ‘माननीय’ बनने की चालाकी

दसवीं पास अनस मलिक कभी मजदूरी करता था। नेताओं के बीच आना-जाना और उनकी शानो-शौकत देख उसका मन भी वैसा बनने को मचल उठा। उसने दिमाग लड़ाया और एक ऐसी फर्जी दुनिया खड़ी कर दी, जिसमें सरकारी गाड़ियों की स्कॉर्ट और अफसरों की सलामी उसकी दिनचर्या बन गई। लेकिन नकली दुनिया ज्यादा दिन नहीं टिकी और पुलिस के हाथों बेनकाब हो गई।

कागजों पर तैयार किया साम्राज्य

अनस ने ‘Human Rights Justice Commission Uttar Pradesh State’ के नाम से एक फर्जी संस्था बनाई। उसने राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह अशोक की लाट और ‘नीति आयोग’ का नाम लैटरपैड पर छपवाया। गोल मोहर और स्टाफ की सूची तैयार कर ली। पत्रों पर हस्ताक्षर और मोहर लगाकर सरकारी दफ्तरों में रुतबा जमाना उसका खास हथियार था।

रौब जमाने के नायाब तरीके

वह सफेद कपड़ों में अपने करीबी साथियों को अर्दली बनाकर साथ रखता था। लेटरहेड और गोल मोहर के सहारे सरकारी दफ्तरों में हुक्म चलाता और लोगों के काम करवाता। उसके जाल में फंसने वाले भोले-भाले लोग आसानी से उसकी बातों में आ जाते।

नौकरी का सपना दिखाकर ठगी

पुलिस भर्ती परीक्षा के दौरान उसने अभ्यर्थियों को नौकरी लगवाने का झांसा दिया। उनसे प्रवेश पत्र और दस्तावेज इकट्ठे कर रखे। किसी की नौकरी लगने पर वह इसे अपनी सिफारिश का असर बताकर मोटा माल ऐंठता था।

पर्दाफाश के बाद जांच तेज

पुलिस की क्राइम ब्रांच अब यह खंगाल रही है कि अनस मलिक के इस जालसाजी के खेल में और कौन-कौन शामिल था। क्या यह ठगी का अकेला खिलाड़ी था या इसके पीछे पूरा गिरोह काम कर रहा था?

NGV PRAKASH NEWS

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