
जी.पी.दुबे
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पुलिस को भी दूसरे का दर्द देखकर दर्द होता है
बस्ती 28 अगस्त 24.
जी हां पुलिस भी आदमी है, पुलिस को भी दर्द होता है, दूसरे की पीड़ा को देखकर उसका भी मन द्रवित हो जाता है |
लोगों के दिमाग में पुलिस का जो चेहरा नजर आता है वह कठोर और क्रूर, निर्दयी किसी के दर्द को ना समझने वाला |
मगर ऐसा नहीं होता पुलिस के भी परिवार हैं उनके भी बच्चे होते हैं वह भी दूसरे का दुख दर्द समझते हैं मगर सिस्टम से बधे होने के कारण वह कुछ ज्यादा नहीं कर सकते उसके बाद भी जहां भी उन्हें मौका मिलता है वहां उनका मानवतावादी चेहरा देखने को नजर आ जाता है…
ऐसा ही कुछ हुआ जब 72 वर्षीय बुजुर्ग परमात्मा प्रसाद मिश्र पुत्र स्वर्गीय गणपत मिश्र जो कचहरी में मुंशी का काम करते हैं और साइकिल से आते जाते हैं |
किसी दौरान उनकी साइकिल चोरी हो गई और वह पैदल ही साइकिल चोरी होने की शिकायत लेकर क्षेत्राधिकारी सदर सतेंद्र भूषण तिवारी के पास गए |
उनकी शिकायत सुनकर क्षेत्राधिकार सदर स्वतंत्र भूषण तिवारी का मन द्रवित हो गया और उन्होंने कार्यवाही का आश्वासन देकर उन्हें रोक लिया |
उन्होंने तत्काल एक नई साइकिल मंगवाई और अपर पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह के हाथों बुजुर्ग को भेंट करवा दी |
वहीं बुजुर्ग को जब नई साइकिल मिली तो उनके आंखों से खुशी के आंसू गिरने लगे और उन्होंने बहुत सारा आशीर्वाद क्षेत्राधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक को दिया |
वहीं लोगों द्वारा क्षेत्राधिकारी सदर स्वतंत्रभूषण तिवारी की नेक कार्य के लिए प्रशंसा की जा रही है |




