
ऐसा गांव जिस धरती का नरक कहा जाता है
रोहतास.
जिले का बरुआ गांव, जो शिवसागर प्रखंड में स्थित है और जिला मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर है |
यह एक ऐसा गाँव है, जिसे लोग धरती का नर्क कहने लगे हैं |
अब जबकि हमारा देश चांद पर पानी की खोज कर रहा है तो सबसे दुख वाली बात यह है कि अपने देश में कौन ऐसा है जहां पर दूषित पानी ने लोगों की जिंदगी को नर्क बना कर रख दिया है |
इस गांव की मुख्य समस्या यहां का दूषित पानी है, पानी में फ्लोराइड की मात्रा इतनी अधिक है कि इसको पीने से गांव के अधिकांश लोग शारीरिक विकलांगता का शिकार हो चुके हैं |
दूषित पानी ने लोगों की हड्डियों को टेढ़ा कर दिया है और दांत समय से पहले सड़ने लगे हैं |
गर्भपात होना यहाँ आम बात हो गई है और जो बच्चे जन्म लेते हैं, उनमें से कई विकलांग पैदा होते हैं |
यह स्थिति सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि भी छोटे नहीं रह गए हैं | वह भी इस जहरीले पानी से प्रभावित हो रहे हैं |
गांव के लगभग 70 से 80 प्रतिशत लोग किसी न किसी प्रकार की विकलांगता से जूझ रहे हैं |
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस गंभीर समस्या को हल करने के लिए अभी तक सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है |
सरकार द्वारा यहां पर काफी समय पहले वाटर प्यूरीफायर सिस्टम लगाया गया था, ताकि पानी की शुद्धता सुनिश्चित की जा सके,लेकिन वह भी अब काम नहीं कर रहा है |
गांव के लोग एक बार फिर से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं |
इस जहरीले पानी का प्रभाव गांव के कई लोगों की जिंदगी पर पड़ा है |
एक समय में स्वस्थ और बेहतरीन फुटबॉलर रहे रामराज प्रसाद आज बिस्तर पर जीवन बिता रहे हैं,अब वह अपने घर के दरवाजे पर चना और कुरकुरे बेचकर गुजारा कर रहे हैं, क्योंकि चलना-फिरना उनके लिए असंभव हो गया है |
गांव के लोगों का कहना है कि
क्या यह उनका अधिकार नहीं है कि उन्हें पीने के लिए कम से कम शुद्ध पानी मिले |
सरकार और प्रशासन इस ओर ध्यान दे, ताकि बरुआ गांव की आने वाली पीढ़ियों को विकलांगता से मुक्ति मिल सके |
शुद्ध पेयजल हर नागरिक का अधिकार है और बरुआ के लोग भी इस अधिकार के हकदार हैं |


