
जी.पी.दुबे
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नियुक्ति पत्र लेकर पहुंचा ज्वाइन करने क्लर्क ने देखकर कहीं यह बात की उड़ गए उसके होश
आजमगढ़ 12 नवंबर 24.
एक युवक, संतोष कुमार सिंह, नौकरी पाने की उम्मीद लेकर आजमगढ़ स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) कार्यालय पहुंचा।
उसके पास एक ज्वाइनिंग लेटर था, जिसे देख वह नौकरी शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार था। लेकिन जैसे ही उसने यह पत्र वहां के अधिकारियों को दिखाया, कार्यालय के बाबू ने उसे वापस लौटा दिया और साफ कह दिया कि यह नियुक्ति पत्र फर्जी है। यह जानकर संतोष के पैरों तले जमीन खिसक गई।
दरअसल, इस पूरी घटना में वाराणसी के शिवपुर क्षेत्र के निवासी किशन सोनकर नाम के व्यक्ति ने संतोष के साथ धोखाधड़ी की थी। संतोष से नौकरी दिलाने के बहाने किशन ने एक लाख 75 हजार रुपये ऐंठ लिए थे। इसमें एक लाख 25 हजार रुपये ऑनलाइन और बाकी 50 हजार रुपये नकद लिए गए थे। किशन ने संतोष को एमएसीटी कोर्ट में नौकरी दिलाने का झांसा दिया और अंग्रेजी में लिखा हुआ एक नियुक्ति पत्र भी दिखाया, जिसे उसने इलाहाबाद का बताया। किशन ने संतोष को यह यकीन दिलाया कि तीन लाख रुपये में उसकी नौकरी पक्की हो जाएगी।
शहर कोतवाली पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर ठंडी सड़क इलाके में किशन सोनकर को गिरफ्तार किया। पुलिस ने तलाशी के दौरान उसके पास से नकली मुहर भी बरामद की। शहर कोतवाल शशिमौलि पांडेय ने इस मामले की पूरी जानकारी दी और बताया कि संतोष कुमार सिंह का किशन से परिचय तब हुआ, जब वह 2 मई को आजमगढ़ किसी काम से आए थे। उसी दौरान किशन ने उसे अपने जाल में फंसाया और नौकरी का लालच दिया। कुछ दिनों तक आरोपी संतोष को अलग-अलग प्रकार के नियुक्ति पत्र दिखाकर जल्द ज्वाइनिंग की बात कहता रहा। अंततः 17 मई को उसने संतोष को फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया, जिसे संतोष ने सच्चा मानकर अपनी ड्यूटी जॉइन करने की कोशिश की।
जब संतोष ने यह पत्र अधिकरण के कार्यालय में दिखाया, तो कार्यालय के बाबू ने यह साफ कर दिया कि नियुक्ति पत्र फर्जी है और उनके कार्यालय द्वारा ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है। इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश होते ही पुलिस ने कार्रवाई कर आरोपी किशन सोनकर को जेल भेज दिया।


