अधूरे पुल से कार गिरने के मामले में बडी कार्यवाही ; 4 अभियंता दोषी

Gyan Prakash Dubey

अधूरे पुल से कार गिरने के मामले में बड़ी कार्रवाई: तीन की हुई थी मौत, चार अभियंता दोषी

बदायूं 25 नवंबर 24.
दातागंज क्षेत्र में अधूरे पुल से कार गिरने की घटना में पहली बड़ी कार्रवाई हुई है। इस हादसे में तीन युवकों की मौत हुई थी। मामला शासन तक पहुंचने के बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रांतीय खंड के दो सहायक अभियंता और दो अवर अभियंता पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही चारों अभियंताओं का निलंबन तय कर दिया गया है।

घटना का विवरण

रविवार तड़के बदायूं और बरेली के बीच रामगंगा नदी पर बने अधूरे पुल से एक कार करीब 20 फुट नीचे गिर गई। इस हादसे में शादी समारोह में जा रहे तीन युवकों की मौत हो गई। ये लोग गूगल मैप के जरिए रास्ता खोजते हुए चल रहे थे और अधूरे पुल पर पहुंच गए। यहां कोई संकेतक या अवरोधक नहीं होने के कारण वे हादसे का शिकार हो गए।

पुल की अधूरी स्थिति और लापरवाही

समरेर और फरीदपुर को जोड़ने वाले इस पुल की एप्रोच रोड पिछले एक साल से अधिक समय से कटी हुई है। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने इस खतरनाक स्थिति को नजरअंदाज किया।

पुल के दोनों ओर मजबूत अवरोधक, बैरिकेडिंग या रिफलेक्टर बोर्ड नहीं लगाए गए।

सड़क कटे होने की कोई चेतावनी या सांकेतिक बोर्ड नहीं था।

पुल के रास्ते को एक पतली दीवार से बंद किया गया था, जिसे अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया।

जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई

पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता मोहम्मद आरिफ और अभिषेक कुमार, अवर अभियंता अजय गंगवार और महाराज सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। इनके अलावा, गूगल मैप के क्षेत्रीय प्रबंधक को भी इस लापरवाही का दोषी माना गया है, क्योंकि मैप ने इस अधूरे रास्ते को सही दिखाया।

न्याय की दिशा में कदम

गूगल मैप प्रबंधक: तहरीर में आरोपी बनाए गए, लेकिन पुलिस ने नाम आरोपियों की सूची में नहीं जोड़ा।

अज्ञात ग्रामीण: दीवार तोड़ने वालों पर भी मुकदमा दर्ज।

निलंबन: सभी अभियंताओं का निलंबन तय।

नायब तहसीलदार छविराम ने स्पष्ट किया कि यह लापरवाही पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की थी, जिन्होंने सतर्कता नहीं बरती। अगर समय रहते कदम उठाए जाते, तो हादसा रोका जा सकता था।

यह हादसा केवल प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है, जिसने तीन युवकों की जान ले ली। इस घटना ने सड़कों और पुलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब सवाल यह है कि दोषियों पर कब और कितनी सख्त कार्रवाई होती है।

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