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नौ बेटियों के बाद बेटे की किलकारी, उचाना कलां में 24 साल बाद परिवार में लौटी खुशियां
उचाना कलां (जींद), 23 जनवरी 2026.
हरियाणा के जींद जिले के उचाना क्षेत्र के उचाना कलां गांव में इन दिनों एक साधारण परिवार की असाधारण खुशी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार चलाने वाले सुरेंद्र के घर 24 साल के लंबे इंतजार के बाद बेटे का जन्म हुआ है। इससे पहले परिवार में लगातार नौ बेटियों का जन्म हुआ था। अब दसवीं संतान के रूप में बेटे की किलकारी गूंजते ही न सिर्फ घर, बल्कि पूरा गांव जश्न में डूब गया।
👉 पिता सुरेंद्र ने कहा कि भगवान ने दिल खुश कर दिया इसलिए बेटे का नाम दिलखुश रख दिया गया |
प्राप्त जानकारी के बेटे के जन्म की खबर जैसे ही गांव में फैली, रिश्तेदारों और पड़ोसियों का तांता लग गया। मिठाइयां बांटी गईं, बधाइयों का सिलसिला शुरू हुआ और हर कोई नवजात को देखने पहुंचा। परिवार ने बेटे का नाम ‘दिलखुश’ रखा है। इसके पीछे परिवार की भावनाएं छिपी हैं—क्योंकि इस बच्चे के आने से सचमुच पूरे परिवार का दिल खुश हो गया।
मिली जानकारी के अनुसार सुरेंद्र और उनकी पत्नी रीतू की शादी को करीब 23–24 साल हो चुके हैं। इन वर्षों में रीतू ने नौ बेटियों को जन्म दिया। परिवार के अनुसार, कुल 10 बेटियां पैदा हुई थीं, जिनमें से एक का पहले ही निधन हो चुका है। सुरेंद्र का एक भाई भी है, जिनकी भी तीन बेटियां हैं। ऐसे में यह नवजात बेटा सिर्फ माता-पिता के लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार की 12 बहनों के लिए इकलौता भाई बन गया है।
नवजात के पिता सुरेंद्र ने भावुक होकर कहा कि उन्हें हमेशा परमात्मा पर पूरा भरोसा था। उन्होंने बताया कि बेटियों को कभी बोझ नहीं समझा और हर हाल में उनका पालन-पोषण किया। “रुखा-सुखा खाकर भी बच्चों को पाला है और आगे भी पाल लेंगे,” सुरेंद्र ने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि अगर इस बार भी बेटा नहीं होता तो परिवार नियोजन कराने का मन बना चुके थे, लेकिन भगवान ने उनकी आस पूरी कर दी।
परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित संसाधनों वाली है, लेकिन इसके बावजूद बच्चों की परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी गई। सुरेंद्र मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाते हैं और कहते हैं कि बच्चों की संख्या ज्यादा जरूर है, लेकिन सभी उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी दौलत हैं।
बेटे के जन्म से परिवार की बुजुर्ग दादी भी बेहद खुश हैं। करीब 70 वर्षीय दादी ने कहा कि इस बच्चे के आने से उनकी आधी बीमारी अपने आप ठीक हो गई है। घर की महिलाएं भी खुशी नहीं छिपा पा रहीं। हालांकि लिंग भेद को लेकर पूछे गए सवाल पर परिवार की एक महिला सदस्य ने यह जरूर कहा कि बेटियां शादी के बाद अपने घर चली जाती हैं और बेटा घर संभालता है, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि घर की सभी बेटियां अपने भाई के जन्म से बेहद खुश हैं और उसकी लंबी उम्र की कामना कर रही हैं।
डिलीवरी से जुड़ी जानकारी देते हुए अस्पताल के डॉक्टर योगेश शर्मा ने बताया कि रीतू को शाम करीब चार बजे उचाना के नागरिक अस्पताल लाया गया था। महिला की उम्र 38 साल है और इससे पहले नौ बार प्रसव हो चुका था, ऐसे में यह डिलीवरी चिकित्सकीय रूप से चुनौतीपूर्ण थी। महिला को विशेष निगरानी में रखा गया, लेकिन प्रसव सामान्य रहा। एक बार बीपी थोड़ा बढ़ा था, जिसे नियंत्रित कर लिया गया। मां और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
परिवार के सदस्य बताते हैं कि घर में अब एक नई जिम्मेदारी के साथ नई खुशी भी आई है। बड़ी बेटी कल्पना ने कहा कि 22 साल बाद घर में छोटा बाबू आया है और यह खुशी शब्दों में बयान करना मुश्किल है। बहनों का कहना है कि वे हमेशा एक-दूसरे का सहारा रही हैं, लेकिन अब घर में भाई का होना उनके लिए खास एहसास और गर्व की बात है।
उचाना कलां गांव में यह कहानी सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि धैर्य, भरोसे और उम्मीद की मिसाल बन गई है। लंबे इंतजार के बाद बेटे के जन्म ने पूरे परिवार को भावुक कर दिया है और ‘दिलखुश’ नाम सचमुच अपने नाम की तरह सबके दिल खुश कर रहा है।
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