
जी.पी.दुबे
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रेलवे ने वेटिंग टिकट कंफर्म होने का फार्मूला बताया, जानिए कैसे मिलती है सीट
नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2024:
ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए वेटिंग टिकट एक बड़ी समस्या बनी रहती है। वेटिंग टिकट मिलने पर यह तय कर पाना मुश्किल हो जाता है कि टिकट कंफर्म होगा या नहीं। खासकर त्योहारों के दौरान जब ट्रेनों में भारी भीड़ होती है, वेटिंग टिकट कंफर्म होने की संभावना और भी कम हो जाती है। इस असमंजस को दूर करने के लिए रेलवे ने वेटिंग टिकट कंफर्म होने का फार्मूला साझा किया है।
👉कैसे होता है वेटिंग टिकट कंफर्म?
रेलवे के अनुसार, औसतन 21% यात्री रिजर्वेशन के बाद अपना टिकट कैंसिल कराते हैं। इसके अलावा, 4-5% यात्री टिकट लेने के बाद भी यात्रा नहीं करते। इस प्रकार कुल 25% सीटों के कंफर्म होने की संभावना बनती है।
उदाहरण के तौर पर, एक स्लीपर कोच में 72 सीटें होती हैं। अगर 25% टिकट कंफर्म होते हैं, तो करीब 18 सीटें कंफर्म हो सकती हैं। यदि किसी ट्रेन में स्लीपर के 10 कोच हैं, तो लगभग 180 सीटों के कंफर्म होने की संभावना बनती है। यही फार्मूला थर्ड एसी, सेकेंड एसी और फर्स्ट एसी कोचों पर भी लागू होता है।
👉इमरजेंसी कोटा भी मददगार
रेलवे के पास इमरजेंसी कोटा भी होता है, जिसमें 10% सीटें रिजर्व रखी जाती हैं। यह कोटा जरूरतमंदों, बीमार यात्रियों और विशेष परिस्थितियों के लिए होता है। यदि इस कोटे से सभी सीटें आवंटित नहीं की जातीं, तो बची हुई सीटें वेटिंग लिस्ट को कंफर्म करने में इस्तेमाल की जाती हैं।
इस जानकारी से यात्री अब अपनी यात्रा को बेहतर तरीके से प्लान कर सकते हैं और वेटिंग टिकट के कंफर्म होने की संभावनाओं को समझ सकते हैं।
👉👉 जनरल गणना पर आधारित.. इसमें बदलाव भी हो सकता है


