शारीरिक संबंध बनाने का मतलब हमेशा रेप नहीं- दिल्ली हाई कोर्ट

G. P. Dubey
9721071175

दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO मामले में आरोपी को किया बरी, कहा— ‘शारीरिक संबंध’ का मतलब हमेशा रेप नहीं

नई दिल्ली, 30 दिसंबर 2024 (NGV PRAKASH NEWS) – दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक व्यक्ति को पॉक्सो (POCSO) मामले में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि नाबालिग पीड़िता द्वारा ‘शारीरिक संबंध’ शब्द का इस्तेमाल करने का अर्थ रेप के रूप में नहीं लगाया जा सकता।

👉साक्ष्यों के अभाव में बरी हुआ आरोपी

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और अमित शर्मा की पीठ ने आरोपी की अपील स्वीकार करते हुए उसकी आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने स्पष्ट प्रमाणों के बिना यह निष्कर्ष निकाला कि जब पीड़िता स्वेच्छा से आरोपी के साथ गई थी, तब रेप का अपराध हुआ था।

👉‘शारीरिक संबंध’ शब्द का अर्थ स्पष्ट नहीं

हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि केवल यह तथ्य कि पीड़िता की उम्र 18 साल से कम है, यह साबित नहीं करता कि यौन उत्पीड़न या रेप हुआ है। अदालत ने जोर देकर कहा कि ‘शारीरिक संबंध’ शब्द को यौन उत्पीड़न या यौन संबंध का प्रमाण मानने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश किए जाने चाहिए। अनुमान के आधार पर ऐसे मामलों में निर्णय नहीं लिया जा सकता।

👉सहमति और नाबालिग का मुद्दा

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि POCSO अधिनियम के तहत, यदि लड़की नाबालिग है, तो सहमति का कोई महत्व नहीं होता। लेकिन ‘शारीरिक संबंध’ शब्द को सीधे यौन उत्पीड़न या रेप के प्रमाण के रूप में नहीं देखा जा सकता।

👉संदेह का लाभ आरोपी को मिला

अदालत ने कहा कि इस मामले में दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं थे। इसलिए, आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया। अदालत ने कहा,

“जब साक्ष्यों में स्पष्टता नहीं होती है, तो आरोपी को बरी किया जाना न्यायोचित है।”

👉मामला मार्च 2017 का है

इस मामले में मार्च 2017 में पीड़िता की मां ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी 14 वर्षीय बेटी को एक अज्ञात व्यक्ति ने बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया। बाद में नाबालिग को फरीदाबाद में आरोपी के साथ पाया गया, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया।

दिसंबर 2023 में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को रेप और यौन उत्पीड़न के आरोप में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन हाईकोर्ट ने इस फैसले को सबूतों के अभाव में रद्द कर दिया और आरोपी को बरी कर दिया।

👉न्यायपालिका के फैसले पर चर्चा जारी

यह फैसला आने के बाद से कानूनविदों और सामाजिक संगठनों के बीच बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे न्याय का महत्वपूर्ण उदाहरण मान रहे हैं, तो कुछ इसके संभावित प्रभावों पर चिंता जता रहे हैं।

NGV PRAKASH NEWS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *