
Gyan Prakash Dubey
टीकमगढ़, 4 जनवरी 2025
NGV PRAKASH NEWS
बकरे पर बैठकर निकली 12 साल के बच्चे की बारात, भाभी से हुई शादी—400 साल पुरानी परंपरा
मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले के एक गांव में 400 साल पुरानी एक अनोखी परंपरा देखने को मिली। यहां 12 साल के बच्चे की बारात घोड़ी के बजाय बकरे पर निकाली गई। यह परंपरा लोहिया समाज में कर्णछेदन (कान छेदने) के संस्कार के दौरान निभाई जाती है।
सैकड़ों साल पुरानी परंपरा
लोहिया समाज में बड़े बेटे के कर्णछेदन को शादी जैसा समारोह माना जाता है। इस रस्म के दौरान बड़े बेटे को दूल्हा बनाया जाता है और उसकी बारात बकरे पर निकाली जाती है। पूरे गांव में बारात घुमाई जाती है, जिसमें परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसी शामिल होते हैं। रस्में पूरी तरह विधि-विधान से संपन्न की जाती हैं।
बकरे पर निकला दूल्हा—हुई धूमधाम
हाल ही में प्रकाश अग्रवाल के 12 साल के पोते राघव अग्रवाल का कर्णछेदन समारोह इसी परंपरा के तहत मनाया गया। दूल्हे को बकरे पर बिठाकर पूरे गांव में घुमाया गया। बारात में रिश्तेदारों ने डांस किया और आतिशबाजी भी हुई।
भाभी से शादी—अनूठी रस्म
इस परंपरा की खास बात यह है कि प्रतीकात्मक तौर पर दूल्हे की शादी उसकी भाभी से कराई जाती है। यह रस्म सामाजिक मान्यताओं और धार्मिक आस्थाओं से जुड़ी है, जिसे कई पीढ़ियों से निभाया जा रहा है।
400 साल पुरानी मान्यता
प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि यह परंपरा उनके दादा-परदादा के जमाने से चली आ रही है और आज भी समाज के लोग इसे पूरी आस्था के साथ निभा रहे हैं। कर्णछेदन समारोह को समाज में बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
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