
रायपुर नगर निगम जोन 9 में भ्रष्टाचार का खेल – निलंबित अधिकारियों की ‘गुपचुप’ बहाली!
रायपुर से मेघा तिवारी की रिपोर्ट | NGV PRAKASH NEWS
रायपुर नगर निगम जोन 9 में सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद निलंबित किए गए अधिकारियों को बिना किसी जांच के चुपचाप उसी कार्यालय में बहाल कर दिया गया है। यह मनमानी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
निलंबित अधिकारी बिना जांच के बहाल
जोन 9 के सड्डू और दलदल सिवनी में हाल ही में बनी कंक्रीट सड़क महज 20 दिनों में ही उखड़ गई। इस मामले में नगर निगम प्रशासन ने दो सब-इंजीनियर रूचि साहू और जयनंदन डहरिया को 19 फरवरी को निलंबित कर जांच के आदेश दिए थे। लेकिन बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे ही, दोनों अधिकारियों को पुनः उसी जोन में बहाल कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, इस बहाली का आदेश जारी तो किया गया, लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। हालांकि, मीडिया के पास इस आदेश की कॉपी पहुंच चुकी है, जिससे इस मामले में नगर निगम की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
भ्रष्टाचार के आरोपियों को बचाने का खेल?
इस घोटाले की गुणवत्ता जांच के लिए सहायक अभियंता ओ.पी. वर्मा जिम्मेदार थे, लेकिन उन्हें पूरी तरह से बचा लिया गया है। बताया जा रहा है कि उनके ऊपर पाटन के एक बड़े राजनेता का संरक्षण है, जिसके चलते न सिर्फ उन्हें बचाया जा रहा है, बल्कि उनके रिटायरमेंट का हवाला देकर जांच को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
ओ.पी. वर्मा का जोन 9 में ‘एकाधिकार’
- वर्मा पर पहले भी बड़े घोटालों में शामिल रहने के आरोप लगे हैं।
- जोन 7 में उनका ट्रांसफर आदेश निकला था, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते निरस्त कर दिया गया।
- वर्मा सिर्फ जोन 9 में ही रहना चाहते हैं और अपनी मर्जी से काम करना चाहते हैं।
- मीडिया से सवाल पूछे जाने पर वे अक्सर चुप्पी साध लेते हैं।
जांच समिति की रिपोर्ट से पहले ही बहाली – नियमों की अनदेखी!
नगर निगम के नियमों के अनुसार, जांच समिति की रिपोर्ट जमा होने के बाद ही किसी अधिकारी के निलंबन पर फैसला लिया जाता है। लेकिन इस मामले में, रिपोर्ट आने से पहले ही रूचि साहू और जयनंदन डहरिया का निलंबन समाप्त कर दिया गया और आदेश क्रमांक 1432/सा.प्र.वि./2025, दिनांक 6-3-2025 के तहत उनकी सेवा को जारी मान लिया गया।
बड़े अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध!
नगर निगम के जी.ए.डी. अपर आयुक्त पंकज शर्मा की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
- आयुक्त द्वारा ओ.पी. वर्मा के खिलाफ जांच के आदेश के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
- निलंबित अधिकारियों की बहाली की प्रक्रिया गुपचुप तरीके से पूरी की गई।
- रूचि साहू के खिलाफ भी शिकायतें थीं, लेकिन उन्हें जोन 9 के एक बड़े अधिकारी का संरक्षण प्राप्त होने के कारण बचा लिया गया।
रूचि साहू पर क्यों हो रहा ‘विशेष’ मेहरबानी?
सूत्रों के अनुसार, रूचि साहू तकनीकी रूप से इस पद के लिए योग्य नहीं हैं, क्योंकि वे आर्किटेक्ट की डिग्री रखते हुए भी सब-इंजीनियर का कार्य देख रही हैं।
- ठेकेदारों का आरोप है कि रूचि साहू महीनों तक बिल पास नहीं करतीं और काम में अनावश्यक देरी करवाती हैं।
- इसके बावजूद उन्हें न सिर्फ सुरक्षित किया गया, बल्कि उसी पद पर बनाए रखा गया।
भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने की कोशिश
रायपुर नगर निगम में हो रही इन गतिविधियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है, बल्कि दोषी अधिकारियों को बचाने और उन्हें फिर से शक्तिशाली पदों पर बैठाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह मामला केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि जल्द ही निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ संकेत होगा कि भ्रष्टाचारियों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है।
NGV PRAKASH NEWS


