
पाकिस्तान के पूर्व हिंदू सांसद का परिवार अब हरियाणा के रतनगढ़ में, कुल्फी बेचकर कर रहे हैं गुजारा
फतेहाबाद, 29 अप्रैल 2025।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें देश छोड़ने के निर्देश दिए थे। लेकिन इसी बीच हरियाणा के फतेहाबाद जिले के रतनगढ़ गांव में एक ऐसा परिवार है जो न सिर्फ भारत में रह रहा है, बल्कि यहां की मिट्टी को ही अब अपनी पहचान मान चुका है। यह परिवार है पाकिस्तान के पूर्व हिंदू सांसद दबाया राम का, जिनका जीवन संघर्ष, उम्मीद और अपनेपन की मिसाल बन चुका है।
पूर्व सांसद दबाया राम फिलहाल गांव-गांव रिक्शे पर कुल्फी और आइसक्रीम बेचकर अपने 34 सदस्यीय परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। वह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 1945 में जन्मे थे और 1988 में लोहिया और बखर जिले से नेशनल असेंबली के लिए निर्विरोध चुने गए थे। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो का समर्थन किया और संसद में अपनी भूमिका निभाई। लेकिन वहां उन्हें कभी सम्मान नहीं मिला, बल्कि उनके परिवार पर धर्म परिवर्तन का दबाव और अपमानजनक घटनाएं होती रहीं।
एक हादसे ने उनकी सोच ही बदल दी — जब उनके ही परिवार की एक बच्ची को जबरन उठा लिया गया और कट्टरपंथियों ने उसका विवाह करवा दिया। जब न्याय की उम्मीद लेकर वे पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तो उन्हें वहां भी सिर्फ निराशा ही मिली।
भारत में एक नई शुरुआत
साल 2000 में उन्होंने अपने 35 रिश्तेदारों के साथ भारत आने का निर्णय लिया। वीजा के तहत रोहतक पहुंचे और बाद में फतेहाबाद जिले के गांव रतनगढ़ को अपना ठिकाना बना लिया। धीरे-धीरे भारत में उनके बच्चों के रिश्ते भी यहीं की बिरादरी में तय हो गए। अब उनके परिवार की अगली पीढ़ी भी यहीं जन्म ले चुकी है।
भारत सरकार द्वारा CAA के तहत उन्हें नागरिकता प्रदान की गई, जिससे अब तक उनके परिवार के 6 सदस्यों को भारतीय नागरिकता मिल चुकी है, जबकि बाकी 28 सदस्य अभी प्रक्रिया में हैं। दबाया राम ने बताया कि उन्होंने और उनके बच्चों ने मजदूरी कर, आइसक्रीम बेची और हर संभव प्रयास किया — लेकिन कभी पाकिस्तान लौटने की नहीं सोची। उन्हें यहां का भाईचारा और आत्मीयता सबसे ज्यादा प्रिय है।
नाम भी बदला गया, पहचान नहीं
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान में उनका नाम ‘देशराज’ था, लेकिन वोटर कार्ड बनवाते वक्त अधिकारियों ने उनका नाम बदलकर ‘दबाया राम’ कर दिया। आज भी गूगल पर पाकिस्तान की 1988 की नेशनल असेंबली की सूची में वह ‘अल्लाह दबाया’ के नाम से 40वें नंबर पर सांसद के रूप में दर्ज हैं।
आखिरी ख्वाहिश: बच्चों को रोजगार मिले
आज दबाया राम की एक ही ख्वाहिश है कि उनके बच्चों को सरकारी नौकरी या कोई रोजगार का अवसर मिल जाए, जिससे उनका जीवन स्थिर और सुरक्षित हो जाए।
NGV PRAKASH NEWS


