
जो नंबर विजय रूपाणी के लिए लकी था, वही बन गया अनलकी — विमान हादसे ने सब कुछ बदल दिया
अहमदाबाद, 13 जून 2025 | NGV PRAKASH NEWS
अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में गुरुवार को हुए भीषण विमान हादसे ने पूरे देश को हिला दिया है। एयर इंडिया की लंदन जाने वाली फ्लाइट टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें 265 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इन मृतकों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे, जो अपनी पत्नी अंजलि और बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे।
इस त्रासदी के बाद एक रहस्यमय संयोग चर्चा में है— ‘1206’, एक ऐसा नंबर जिसे विजय रूपाणी अपने लिए बेहद लकी मानते थे, वही 12 जून (12/06) की तारीख उनके जीवन का अंतिम दिन बन गई।
शुभ नंबर बना अमंगल संकेत
विजय रूपाणी की पहली कार हो या वर्षों पुराना स्कूटर— दोनों का नंबर था ‘1206’। उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि यह नंबर उन्हें हर बार सफलता और उन्नति दिलाता रहा है। आज भी उनके घर के बाहर वही स्कूटर और कार खड़ी है, जिन पर 1206 अंकित है।
लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था— 12 जून 2025 (12/06) की सुबह, यही संख्या एक खौफनाक हादसे से जुड़ गई।
मंदिरों में प्रार्थना, घर में सन्नाटा
जैसे ही विमान हादसे की खबर फैली, अहमदाबाद के विजय रूपाणी के आवास के बाहर सन्नाटा पसर गया। स्थानीय लोगों ने उनके घर के पास स्थित मंदिर में पूजा-पाठ शुरू कर दिया। रुपाणी परिवार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, और उनका घर भी फिलहाल खाली बताया जा रहा है।
कैसे हुआ हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फ्लाइट ने जैसे ही अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरी, कुछ मिनटों बाद ही वह तेजी से ऊंचाई खोने लगी। विमान सबसे पहले बी.जे. मेडिकल कॉलेज की मेस बिल्डिंग से टकराया, फिर बगल के अतुल्यम हॉस्टल से जा टकराया, जहां वरिष्ठ डॉक्टर्स रहते थे। दोनों इमारतों में भीषण आग लग गई, जिससे कई लोग झुलस गए।
बचाव कार्य में जुटी सभी एजेंसियां
सेना, नगर निगम और मेडिकल टीमें संयुक्त रूप से राहत-बचाव कार्यों में दिन-रात जुटी हुई हैं। घायलों को एसवीपी हॉस्पिटल और सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे की वजह तकनीकी खराबी बताई जा रही है, हालांकि विस्तृत जांच के आदेश दिए जा चुके हैं।
विजय रूपाणी जैसे वरिष्ठ नेता का यूं अचानक जाना न सिर्फ गुजरात, बल्कि पूरे देश के लिए एक भावनात्मक क्षति है। और जिस नंबर को उन्होंने जीवनभर शुभ माना, उसी के साथ उनके जीवन की त्रासदपूर्ण पूर्णविराम जुड़ गया।
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