
पानीपत, 21 जून 2025
NGV PRAKASH NEWS
18 साल लिव-इन में रहे, दो बच्चे हुए…अब बुजुर्ग की फरियाद- “मैडम! इससे पीछा छुड़वा दो”
हरियाणा के पानीपत में महिला आयोग की चेयरपर्सन रेनू भाटिया की जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने वहां मौजूद लोगों को हैरत में डाल दिया। रोजमर्रा की घरेलू कलह और प्रताड़ना के मामलों के बीच यह कहानी लिव-इन रिलेशनशिप, अधिकार और जिम्मेदारी की उलझी गुत्थियों को उजागर करती नजर आई।
बैठक में एक महिला पहुंची, जिसने अपने कथित पति और ससुराल वालों पर मारपीट का आरोप लगाया। पहले तो मामला आम लगा, लेकिन जब पुरुष की बारी आई अपनी बात रखने की, तो हर कोई चौंक गया। बुजुर्ग ने कहा, “मैडम, हमारी शादी ही नहीं हुई। ये महिला 18 साल से मेरे साथ लिव-इन में रह रही है। दो बच्चे—एक बेटा, एक बेटी—हैं। मेरी पहली पत्नी की मौत के बाद लोगों ने इसे मेरे साथ जोड़ दिया। मैंने कभी शादी नहीं की इससे।”
महिला का पक्ष भी कम दिलचस्प नहीं था। उसने कहा, “मुझसे धोखे से हिंदू रीति-रिवाजों से शादी की गई। अब मेरे बच्चों का जायदाद में हक चाहिए।” विवाद की परतें खुलीं तो सामने आया कि असल लड़ाई बच्चों के हक और संपत्ति को लेकर है।
बुजुर्ग ने महिला आयोग से गुहार लगाई, “मैडम! इससे पीछा छुड़वा दो, मैं इसके लिए कुछ भी करने को तैयार हूं।” इस पर चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने दो टूक कहा, “आज तक का रिकॉर्ड यही कहता है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली कोई भी लड़की खुश नहीं रहती।”
आयोग ने दोनों पक्षों की सहमति से यह तय किया कि बच्चों के नाम के दस्तावेज महिला आयोग के समक्ष पेश किए जाएंगे और बच्चों के अधिकारों की वैधानिक स्थिति तय होने के बाद मामला निस्तारित किया जाएगा।
पानीपत के इस मामले ने समाज में लिव-इन रिलेशनशिप की हकीकत, महिलाओं की स्थिति और बच्चों के अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी है।
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