Gyan Prakash Dubey


सिद्धार्थनगर में मुठभेड़ के बाद ₹25,000 के इनामी टॉप-10 अपराधी आया पुलिस की गिरफ्त में
– NGV PRAKASH NEWS विशेष रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर जनपद की सघन पुलिसिया कार्यवाही ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराध कितना भी पुराना और अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों से बच पाना नामुमकिन है। बीती रात 7-8 जुलाई 2025 को जिले की लोटन-ठोठरी मार्ग पर स्थित महदेईया मोड़ पर घटित एक मुठभेड़ की घटना ने इस विचार को और भी मजबूती से समाज के सामने रखा। यह मुठभेड़ कोई सामान्य पुलिसिया कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह सिद्धार्थनगर के अपराधिक इतिहास में दर्ज एक कुख्यात अध्याय को समेटने वाली निर्णायक भिड़ंत थी, जिसमें पुलिस और अपराध का आमना-सामना हुआ — और जीत हुई क़ानून की।
यह मुठभेड़ सिद्धार्थनगर के टॉप-10 अपराधियों में शामिल, ₹25,000 के इनामी और 31 गंभीर मुकदमों में वांछित सिराजुद्दीन उर्फ बबलू के साथ हुई। सिराजुद्दीन, जो मोहाना थाना क्षेत्र के वर्डपुर गोसाईगंज का रहने वाला है, छात्र जीवन से ही अपराध की राह पर चल पड़ा था। NDPS एक्ट, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट, चोरी, लूट, डकैती और संगठित अपराध जैसे दर्जनों संगीन आरोपों के साथ उसका आपराधिक इतिहास 2009 से लगातार सक्रिय रहा है। वह केवल सिद्धार्थनगर ही नहीं, बल्कि बस्ती, महराजगंज और यहां तक कि नेपाल में भी आपराधिक वारदातों को अंजाम दे चुका है।
पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन के नेतृत्व में जनपद पुलिस ने जिस तरह से संगठित अपराध के खिलाफ अभियान चलाया, वह प्रशंसनीय है। अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद, क्षेत्राधिकारी मयंक द्विवेदी, लोटन थानाध्यक्ष दिनेश कुमार सरोज, मोहाना थानाध्यक्ष रोहित उपाध्याय और एसओजी प्रभारी जीवन त्रिपाठी सहित पुलिस टीम ने साझा रणनीति के तहत इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। सूचना मिलने पर टीम ने संयुक्त चेकिंग के दौरान अपराधी को घेर लिया। लेकिन सिराजुद्दीन ने सरेंडर करने के बजाय पुलिस पर जानलेवा हमला करते हुए फायरिंग कर दी। थानाध्यक्ष लोटन बाल-बाल बचे। जब पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, तो सिराजुद्दीन के पैर में गोली लगी और घायल होने के बाद उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से 315 बोर का अवैध तमंचा, एक जिन्दा कारतूस, एक खोखा कारतूस, एक मोटरसाइकिल और एक मोबाइल फोन बरामद किया। गिरफ्तार अभियुक्त ने पूछताछ में कबूला कि वह एक संगठित गैंग का हिस्सा है, जो सिद्धार्थनगर समेत अन्य जिलों में चोरी, लूटपाट और तस्करी जैसी वारदातों को अंजाम देता है। हाल ही में उसके कुछ साथी ढेबरूआ थाना क्षेत्र से पकड़े गए थे और वह खुद नेपाल भागने की कोशिश कर रहा था, तभी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उसने यह भी स्वीकारा कि अपराध ही उसकी आजीविका का मुख्य स्रोत बन गया था और वह पुलिस व न्यायालय से लगातार बचने की फिराक में था। उस पर पहले से न्यायालय द्वारा 82 की कार्यवाही हो चुकी थी।
यह गिरफ्तारी केवल एक अपराधी की पकड़ नहीं है, बल्कि समाज में छिपे उन तमाम शातिर तत्वों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि अपराध की दुनिया कितनी भी आकर्षक क्यों न लगे, उसका अंजाम अंततः गोली, जेल या शर्मनाक पराजय ही होता है। पुलिस की इस सफलता ने जनपद में शांति और विश्वास की भावना को और भी गहरा किया है। यह घटना केवल एक समाचार नहीं, बल्कि समाज, प्रशासन और अपराध के बीच चल रही एक लंबी लड़ाई का ऐसा अध्याय है जो यह दर्शाता है कि जब कानून अपने पूरे रूप में सक्रिय होता है, तब अराजकता को सिर उठाने की इजाजत नहीं मिलती।
इस पूरे ऑपरेशन में शामिल पुलिस टीम – लोटन व मोहाना थाना की टीमें, एसओजी टीम, सिपाही से लेकर निरीक्षक तक – सभी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने न केवल अपनी जान जोखिम में डालकर एक खतरनाक अपराधी को गिरफ्तार किया, बल्कि जिले के नागरिकों को एक नई उम्मीद और सुरक्षा का भरोसा भी दिलाया।
सच कहा जाए तो यह मुठभेड़ एक नाटकीय घटना भर नहीं थी, बल्कि यह सिद्धार्थनगर की उस सामाजिक चेतना की झलक है जिसमें अपराध के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना ही सच्चा विकास है।
– NGV PRAKASH NEWS
