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गृहिणियां केवल ‘होममेकर’ नहीं, बल्कि ‘नेशन बिल्डर’, सुप्रीम कोर्ट की ऐतिहासिक टिप्पणी
नई दिल्ली, 11 जून 2026.
सुप्रीम कोर्ट ने गृहिणियों की भूमिका और योगदान को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि महिलाओं को केवल ‘होममेकर’ नहीं बल्कि ‘नेशन बिल्डर’ कहा जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि गृहिणियां परिवार, समाज और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इसलिए उनके योगदान को कमतर नहीं आंका जा सकता।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी एक सड़क दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान की। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वर्ष 2024 के एक फैसले से जुड़ा था, जिसमें वर्ष 2001 में दो जीपों की टक्कर में एक महिला की मृत्यु के बाद उसके पति और तीन बच्चों को मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। इस फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई करते हुए पीड़ित परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गृहिणी का कार्य केवल खाना बनाना, कपड़े धोना, घर की साफ-सफाई करना या परिवार की देखभाल तक सीमित नहीं है। वह परिवार की बुनियाद को मजबूत करती है, बच्चों के व्यक्तित्व और भविष्य के निर्माण में अहम भूमिका निभाती है तथा समाज और राष्ट्र के विकास में अप्रत्यक्ष लेकिन बेहद महत्वपूर्ण योगदान देती है।
पीठ ने यह भी कहा कि यदि गृहिणियों द्वारा घर में किए जाने वाले कार्यों का आर्थिक मूल्यांकन किया जाए तो उनकी अनुमानित मासिक आय लगभग 30 हजार रुपये तक आंकी जा सकती है। ऐसे में किसी महिला को केवल इस आधार पर ‘आयहीन’ नहीं माना जा सकता कि वह घर के बाहर नौकरी नहीं करती थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटना या अन्य मामलों में गृहिणी की मृत्यु होने पर मुआवजा तय करते समय यह नहीं कहा जा सकता कि मृतका की कोई आय नहीं थी। मुआवजा निर्धारित करते समय उसकी उम्र, शिक्षा, कौशल, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को गृहिणियों के योगदान को औपचारिक मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में मुआवजा निर्धारण से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।
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