Gyan Prakash Dubey



अधिकांश लोगों द्वारा भारत में हिंदूवादी और गौ रक्षक सरकार के रहते हुए गाय के मांस (वीफ ) कि निर्यात की बात की जाती है, मगर सच्चाई इसके बिलकुल उलट है और भारत में. गाय के मांस की निर्यात पर पूरी तरह प्रतिबंध है |. पढ़े विस्तृत रिपोर्ट..
गौमाता और बीफ़ निर्यात: श्रद्धा और व्यापार के बीच फंसा भारत
भारत भैंस के मांस (कैराबीफ) का बड़ा निर्यातक, लेकिन गाय के मांस पर सख्त प्रतिबंध
NGV PRAKASH NEWS | विशेष रिपोर्ट
भारत एक ऐसा देश है जहां गौ माता को देवत्व का दर्जा प्राप्त है। मंदिरों में जहां गायों की सेवा को पुण्य माना जाता है, वहीं दूसरी तरफ आंकड़े कहते हैं कि भारत विश्व के सबसे बड़े बीफ़ निर्यातक देशों में शामिल है। यह विरोधाभास अक्सर चर्चा और विवाद का विषय बनता है। लेकिन इस विरोधाभास को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि भारत वास्तव में क्या निर्यात करता है – गाय का मांस या कुछ और?
🐄 गाय का मांस (Cow Meat) और भारत में स्थिति: स्पष्ट और कठोर प्रतिबंध
- भारत से गाय का मांस निर्यात नहीं किया जाता है।
- गाय, बैल और बछड़े के वध पर भारत के अधिकांश राज्यों में कानूनी प्रतिबंध है।
- भारतीय दंड संहिता और राज्यों के विशेष गोवध अधिनियमों के अंतर्गत गाय की हत्या, मांस की बिक्री और वितरण दंडनीय अपराध है।
- APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) और भारत सरकार की नीतियों के अनुसार भारत से केवल भैंस के मांस (Buffalo Meat – जिसे कैराबीफ कहा जाता है) का निर्यात अनुमन्य है।
- नोट करें: भारत से Cow Meat (गाय का मांस) का निर्यात शून्य है।
🐃 तो फिर ‘बीफ निर्यातक’ कैसे है भारत? – कैराबीफ की कहानी
भारत में बीफ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर कैराबीफ (भैंस का मांस) के लिए किया जाता है। यही वह उत्पाद है जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किया जाता है।
- भारत हर साल लगभग 1.3–1.6 मिलियन मीट्रिक टन भैंस का मांस निर्यात करता है।
- वित्तीय वर्ष 2023–24 में यह निर्यात $3.74 बिलियन (करीब ₹31,000 करोड़) का रहा।
- 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर $4.2 बिलियन से अधिक होने का अनुमान है।
- यह निर्यात APEDA से लाइसेंस प्राप्त प्रसंस्करण संयंत्रों से होता है, जो केवल भैंसों को वैध रूप से काटते हैं, गायों को नहीं।
🌐 भारत के मुख्य बीफ़ निर्यात बाजार
भारत का भैंस मांस दुनिया के कई मुस्लिम बहुल और एशियाई देशों में निर्यात किया जाता है, जैसे:
- वियतनाम
- मलेशिया
- इंडोनेशिया
- इराक
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात
- मिस्र
इन देशों में भारतीय कैराबीफ की मांग उच्च गुणवत्ता और कम कीमत के कारण बहुत अधिक है।
⚖️ गौमाता के पूजन और बीफ़ निर्यात – विरोधाभास या व्यावसायिक विवशता?
भारत में गाय का धार्मिक महत्व सर्वोपरि है।
- हिंदू परंपरा में गाय को ‘माता’ का दर्जा प्राप्त है।
- कई धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा गौ हत्या के विरुद्ध सशक्त अभियान चलाए जाते हैं।
- कई राज्यों ने गाय की हत्या पर कड़े कानून बना रखे हैं, जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात आदि।
- लेकिन विरोधाभास तब उत्पन्न होता है जब ‘भारत बीफ़ निर्यातक देश’ के रूप में वैश्विक सूची में सामने आता है।
सच्चाई यह है:
👉 भारत गाय का मांस नहीं, बल्कि भैंस का मांस निर्यात करता है।
👉 लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार वर्गीकरण में दोनों को एक ही श्रेणी ‘बीफ़’ में रखा जाता है, जिससे भ्रम और विरोधाभास पैदा होता है।
👉 इस भ्रम के कारण ही समाज में कई बार धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, और गलतफहमियों का जन्म होता है।
📢 दोनों पक्षों की दलीलें
| पक्ष | विवरण |
|---|---|
| समर्थक (वाणिज्यिक दृष्टिकोण) | भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी भैंस जनसंख्या है। इसका मांस मुस्लिम और एशियाई बाजारों में लोकप्रिय है। इससे करोड़ों का विदेशी मुद्रा अर्जित होता है और लाखों लोगों को रोज़गार मिलता है। |
| विरोधी (धार्मिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण) | ‘बीफ़’ शब्द का प्रयोग जनता को भ्रमित करता है। कई बार अवैध गोकशी, तस्करी और कानून उल्लंघन की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। धार्मिक संगठनों का मानना है कि **गौवंश की किसी भी प्रकार की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध होना चाहिए। |
🔚 निष्कर्ष: अर्थव्यवस्था और आस्था के बीच संतुलन की आवश्यकता
भारत एक ऐसा देश है जहां धर्म और व्यापार दोनों की समान रूप से अहमियत है। भैंस के मांस का निर्यात यदि कानूनी है और उससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है, तो वहीं देश की बड़ी आबादी गाय को माता मानकर उसके प्रति श्रद्धा रखती है।
ऐसे में ज़रूरी है कि सरकार, मीडिया और समाज मिलकर स्पष्ट संप्रेषण करें — कि भारत में गाय की हत्या और उसका निर्यात पूरी तरह प्रतिबंधित है, और जो बीफ़ निर्यात हो रहा है वह केवल भैंस का मांस (कैराबीफ) है।
📌 NGV PRAKASH NEWS
“जहाँ तथ्य और भावना दोनों का सम्मान होता है।”
