नाबालिकों के प्रेम प्रसंग में केवल लड़कों पर ही पास्को क्यों- हाई कोर्ट

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नाबालिग प्रेम प्रसंग में केवल लड़कों पर क्यों पॉक्सो- हाई कोर्ट ने उठाया बड़ा सवाल

देहरादून, 11 सितम्बर 2025।
उत्तराखंड हाई कोर्ट ने नाबालिगों के प्रेम प्रसंग से जुड़े मामलों में एक अहम मुद्दे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने पूछा है कि आखिर क्यों ऐसे मामलों में केवल लड़कों को ही दोषी मानकर हिरासत में लिया जाता है और उन पर पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जाता है?

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उप्रेती की खंडपीठ ने इस विषय पर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और सभी राज्यों से जवाब मांगा है।

“लड़के हमेशा दोषी क्यों?”

याचिकाकर्ता अधिवक्ता मनीषा भंडारी ने अदालत के सामने तर्क दिया कि नाबालिग प्रेम प्रसंग के मामलों में न्याय का तराजू असंतुलित नज़र आता है। भले ही लड़का लड़की से उम्र में छोटा क्यों न हो, लेकिन दोष केवल उसी के सिर मढ़ दिया जाता है। नतीजतन उसे पॉक्सो कानून के तहत अभियोजन का सामना करना पड़ता है और पढ़ाई-लिखाई की उम्र में उसे किशोर सुधार गृह की सलाखों के पीछे धकेल दिया जाता है।

“सज़ा नहीं, परामर्श ज़रूरी”

भंडारी ने दलील दी कि ऐसे मामलों को आपराधिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि परामर्श और मार्गदर्शन की नज़र से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब दोनों ही पक्ष नाबालिग हों तो लड़के को ‘अपराधी’ और लड़की को ‘पीड़िता’ मानना न्यायसंगत नहीं है।

अदालत की गंभीरता

हाई कोर्ट ने इस मुद्दे को गम्भीर मानते हुए कहा कि यह सवाल केवल कानून का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और लैंगिक समानता का भी है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों से स्पष्ट जवाब देने को कहा है कि आखिर क्यों अब तक इस प्रचलन पर पुनर्विचार नहीं हुआ।

यह मामला न सिर्फ पॉक्सो कानून की व्याख्या बल्कि समाज में व्याप्त उस सोच को भी चुनौती देता है, जहां प्रेम प्रसंग में नाबालिग लड़कों पर ही ठीकरा फोड़ा जाता है।

(NGV PRAKASH NEWS)


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