Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

श्रम दिवस पर प्रेस क्लब में पत्रकारों का जुटान, न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग तेज
लखनऊ, 01 मई 2026.
अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर राजधानी लखनऊ स्थित प्रेस क्लब में पत्रकारों का व्यापक जुटान हुआ, जहां विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों और पत्रकारों ने अपने अधिकारों, सुरक्षा और सम्मानजनक सुविधाओं को लेकर एक स्वर में आवाज उठाई। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि वह 3 मई को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडवीया से मुलाकात कर ईपीएफ की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा करेंगे।

उन्होंने कहा कि यूपी वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन द्वारा दिए गए ज्ञापन के आधार पर यह पहल की जा रही है, जिसमें न्यूनतम पेंशन को वर्तमान 1000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये किए जाने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई है। अनिल राजभर ने यूनियन से प्रदेश स्तर पर एक व्यापक संवाद कार्यक्रम आयोजित करने का भी आग्रह किया, जिसमें वह स्वयं दो से तीन घंटे का समय देकर पत्रकारों से सीधा संवाद करेंगे।
कार्यक्रम में यूनियन के प्रादेशिक अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन के प्रमुख बिंदुओं को विस्तार से रखा। उन्होंने पत्रकारों के लिए पेंशन व्यवस्था लागू करने, पत्रकार सुरक्षा कानून लागू किए जाने, पीजीआई में सभी श्रमजीवी पत्रकारों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, प्राथमिकता के आधार पर भूखंड आवंटन, आर्थिक सहायता के लिए स्थायी व्यवस्था तथा ट्रेन किराए में छूट की व्यवस्था पुनः लागू करने की मांग उठाई।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान ने कहा कि पत्रकारिता के सामने वर्तमान समय में कई चुनौतियां हैं, लेकिन इसके बावजूद पत्रकारों को निडर होकर सच्चाई को सामने लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज के वंचित, परेशान और पीड़ित वर्ग की आवाज को पत्रकार अपनी कलम के माध्यम से सरकार और शासन तक पहुंचाते हैं, जो लोकतंत्र की मजबूती का आधार है।
यूपी प्रेस क्लब के अध्यक्ष रविंद्र कुमार सिंह ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पहले सरकार की नीतियों की विसंगतियों पर स्वस्थ आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा मानी जाती थी, लेकिन अब ऐसी आलोचना भी पत्रकारों के लिए खतरे का कारण बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और खबरों को रोका जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
हिंद मजदूर महासभा के प्रदेश महामंत्री उमाशंकर मिश्र ने कहा कि पत्रकारों के वेज बोर्ड का गठन बंद हो चुका है और कोरोना काल के बाद पत्रकारों की सुविधाओं में कमी आई है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पत्रकार अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें। उन्होंने यह भी कहा कि नई श्रम संहिताओं के लागू होने के बावजूद पत्रकारों के हितों की अनदेखी हो रही है और कार्यघंटों में भी वृद्धि की गई है।
इसी क्रम में यूनियन के मंडल अध्यक्ष शिवशरण सिंह ने कहा कि पत्रकार संगठनों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनके हितों के लिए ठोस कार्य नहीं हो रहा है। प्रदेश महामंत्री देवराज सिंह ने कहा कि पत्रकारों के श्रम के साथ न्याय नहीं किया जा रहा है और सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रजत मिश्रा ने भी पत्रकारों की समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में अनिल त्रिपाठी, राजीव बाजपेई, सुमन गुप्ता, कला निधि मिश्रा, अनिल सैनी, तमन्ना फरीदी, अजीत कुमार सिंह, मुकुल मिश्रा, महिमा तिवारी, आदर्श प्रकाश सिंह, नासिर, नायला किदवई, रेनू निगम, गिरीश श्रीवास्तव, शैलेंद्र सिंह, आशीष सिंह, त्रिलोक नाथ मिश्रा, शिव विजय सिंह, नितिन श्रीवास्तव, आदित्य शुक्ला, नजम एहसन, अब्दुल वाहिद, जुबेर अहमद, संजय सिंह, राकेश शुक्ला, अमित यादव, राजेश शुक्ला, विजय मिश्रा, अमरेंद्र सिंह, हरिराम अरोड़ा, सूर्य नारायण सिंह, रामचंद्र वर्मा, हुजैफा अबरार, सौरभ निगम सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए अनेक पत्रकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्रेमकांत तिवारी ने किया। पूरे आयोजन में पत्रकार एकजुटता, अधिकारों के प्रति जागरूकता और अपने हितों के लिए संघर्ष का स्पष्ट संदेश देखने को मिला।
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