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जालौन में बेटी ने दी पिता को मुखाग्नि: रूढ़ियों को तोड़कर पेश की मिसाल
जालौन, 11 सितम्बर 2025 | NGV PRAKASH NEWS
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने समाज को गहराई से झकझोर दिया। कोतवाली क्षेत्र के औरखी गांव में पारिवारिक विवाद के चलते एक मृतक का शव दो दिन तक घर में पड़ा रहा। जब किसी ने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी नहीं उठाई, तो बेटी शिल्पी ने समाज की परंपराओं को तोड़ते हुए खुद अपने पिता को कंधा दिया और मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया।
दो दिन तक पड़ा रहा शव
औरखी गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद पारिवारिक विवाद के कारण परिवार में कोई भी अंतिम संस्कार के लिए आगे नहीं आया। शव दो दिन तक घर में ही रखा रहा। स्थिति की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
बेटी शिल्पी का साहसिक कदम
पोस्टमार्टम के बाद जब शव दाह संस्कार के लिए तैयार हुआ, तो बेटी शिल्पी ने पिता के शव को अपने कंधे पर उठाया और गांव से श्मशान घाट तक पैदल लेकर गई। वहां उसने स्वयं चिता को मुखाग्नि दी। शिल्पी का यह साहसिक और भावुक कदम न केवल परंपराओं को चुनौती देता है, बल्कि समाज में बेटियों की जिम्मेदारी और अधिकार का सशक्त संदेश भी देता है।
पुलिस की तत्परता
जालौन कोतवाली पुलिस ने इस मामले में संवेदनशीलता दिखाई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद दाह संस्कार की प्रक्रिया को भी पुलिस की देखरेख में संपन्न कराया गया। कोतवाली प्रभारी ने कहा— “पारिवारिक विवाद के कारण शव का अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा था। शिल्पी ने जो साहस दिखाया, वह सराहनीय और समाज के लिए प्रेरणादायक है।”
सामाजिक बदलाव का प्रतीक
भारत में परंपरागत रूप से अंतिम संस्कार और शव को कंधा देने का कार्य पुरुषों से जुड़ा रहा है। लेकिन शिल्पी ने इस सोच को तोड़ते हुए साबित किया कि बेटियां भी अपने माता-पिता के प्रति वही कर्तव्य निभा सकती हैं, जो बेटे निभाते हैं। गांववालों ने शिल्पी के इस कदम की खुलकर सराहना की और इसे एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक बताया।
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