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टीईटी अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट आदेश के खिलाफ यूपी सरकार की रिव्यू पिटीशन, शिक्षकों को राहत देने की कोशिश
लखनऊ, 22 सितम्बर 2025। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अहम पहल की है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और शिक्षकों की चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितम्बर को आदेश दिया था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। इस फैसले से पहले से सेवा दे रहे कई शिक्षक, जिनके पास टीईटी नहीं है, अपनी नौकरी खोने के डर से मानसिक दबाव में आ गए हैं। हालात इतने गंभीर हो गए कि बीते दिनों दो शिक्षकों की मौत के बाद परिजनों ने इसे मानसिक तनाव का परिणाम बताया। यही वजह है कि राज्य सरकार ने शिक्षकों के हित में अदालत से पुनर्विचार की गुहार लगाई है।
“अनुभव को दरकिनार करना उचित नहीं” – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों ने बच्चों के भविष्य संवारने में अपना अहम योगदान दिया है। सरकार समय-समय पर उन्हें प्रशिक्षण देती रही है और उनके अनुभव को नकारना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट में राज्य का पक्ष मजबूती से रखा जाए ताकि सेवारत शिक्षकों को राहत मिले और वे निश्चिंत होकर बच्चों की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट का तर्क
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई शिक्षक यह परीक्षा पास नहीं करता तो उसकी नौकरी की निरंतरता और प्रमोशन प्रभावित होगा। इस आदेश से लाखों शिक्षकों का भविष्य संकट में पड़ गया है।
कितने शिक्षक होंगे प्रभावित?
प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षक ऐसे हैं जिनकी नियुक्ति बिना टीईटी के हुई थी। कोर्ट के आदेश के अनुसार –
- जिनकी सेवा अवधि 5 वर्ष से कम शेष है और वे टीईटी पास नहीं करते, उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी।
- जिनकी सेवा अवधि 5 वर्ष से अधिक बची है, उन्हें 2 वर्ष के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। अन्यथा उनकी सेवा और प्रमोशन, दोनों प्रभावित होंगे।
राज्य सरकार का यह कदम उन लाखों शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है, जो वर्षों से शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं लेकिन अब अपने भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता में थे।
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