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काबुल से दिल्ली तक मौत से जंग: 14 वर्षीय अफगान लड़का व्हील वेल में छिपकर पहुंचा भारत
दिल्ली, 23 सितम्बर 2025।
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रविवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जब अफगानिस्तान का एक 14 वर्षीय लड़का काबुल से दिल्ली आने वाली केएएम एयर की फ्लाइट RQ4401 में पिछले पहिये (व्हील वेल) में छिपकर भारत पहुंच गया। करीब 94 मिनट की इस खतरनाक यात्रा ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी, बल्कि यह भी दिखाया कि जिंदगी और मौत के बीच किस कदर संयोग का खेल होता है।
जानकारी के मुताबिक, बच्चा यात्रियों की गाड़ियों के पीछे-पीछे चलते हुए बिना किसी रोक-टोक के एयरपोर्ट के भीतर पहुंचा और विमान के व्हील वेल में जाकर छिप गया। पूछताछ में उसने बताया कि उसका इरादा ईरान जाने का था, लेकिन गलती से वह भारत आने वाली उड़ान में चढ़ गया। फिलहाल उसे काबुल वापस भेज दिया गया है।
कैसे बच गई जान?
विशेषज्ञों के अनुसार, आमतौर पर 30 हजार फीट की ऊंचाई पर तापमान -40 से -60 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है और ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम हो जाती है। ऐसे हालात में अधिकांश लोग कुछ ही मिनटों में बेहोश हो जाते हैं और जीवित बचने की संभावना लगभग नामुमकिन होती है। लेकिन इस लड़के के मामले में माना जा रहा है कि उड़ान कम ऊंचाई पर रही और तापमान व दबाव सामान्य बने रहे, जिसकी वजह से उसकी जान बच गई।
व्हील वेल: मौत का फंदा
विमान का व्हील वेल लैंडिंग गियर रखने की बेहद तंग जगह होती है। यहां न तो हवा की पर्याप्त आपूर्ति होती है और न ही इंसानी शरीर के लिए उपयुक्त तापमान। इसके अलावा, उड़ान के दौरान पहिये के खिंचने और लैंडिंग के समय खुलने से किसी भी व्यक्ति की जान तुरंत जा सकती है। इसीलिए विशेषज्ञ इसे सबसे खतरनाक छिपने की जगह मानते हैं।
दुनिया में पहले भी हुईं ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब कोई व्यक्ति विमान के व्हील वेल में छिपकर सफर करने की कोशिश कर रहा हो।
- 2014 में अमेरिका के कैलिफोर्निया से हवाई जा रही एक फ्लाइट में 16 वर्षीय युवक व्हील वेल में पाया गया था। पांच घंटे की यात्रा के बावजूद वह चमत्कारिक रूप से जिंदा बच गया।
- 2010 में दुबई से लंदन पहुंची फ्लाइट में एक शख्स मृत पाया गया था, जिसने पहिये में छिपकर यात्रा करने की कोशिश की थी।
- कई अन्य मामलों में भी यात्रियों ने इस तरह से उड़ान भरने की कोशिश की, लेकिन ऑक्सीजन की कमी और ठंड की वजह से वे जिंदा नहीं बच सके।
इन घटनाओं से साफ है कि व्हील वेल में छिपकर यात्रा करना लगभग मौत को दावत देने जैसा है, और किसी के बच निकलने की संभावना बेहद कम होती है।
सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना एयरपोर्ट सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। एक बच्चा इतनी आसानी से यात्रियों की गाड़ियों के पीछे-पीछे विमान तक कैसे पहुंच गया, यह जांच का विषय है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी चूक दुर्लभ होती है, लेकिन अगर इस पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
बचपना या साहसिक कारनामा?
यह घटना कहीं न कहीं बचपने की गलती और साहसिक कारनामे का मिश्रण लगती है। 14 साल का यह लड़का अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए मौत से खेलने को तैयार था। यह कहना मुश्किल है कि उसने जानबूझकर खतरा मोल लिया या केवल जिज्ञासा और गलती की वजह से उसने यह कदम उठाया। लेकिन इतना साफ है कि इस घटना ने एक बार फिर हवाई सुरक्षा की खामियों और मानव जिजीविषा दोनों को उजागर कर दिया है।
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