

NGV PRAKASH NEWS
बस्ती, 25 सितंबर 2025
समाधान दिवस में अधिकारियों की लापरवाही का एक नया मामला सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला तब उजागर हुआ जब एक युवक ने अपनी बेरोजगारी और पढ़ाई-लिखाई का हवाला देते हुए प्रार्थना पत्र समाधान दिवस में प्रस्तुत किया। युवक ने आवेदन में लिखा कि उसने बीएससी और एमए की पढ़ाई पूरी कर ली है और अब वह सरकारी विभाग में किसी पद के लिए पात्र है।
लेकिन आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि शिकायत प्राप्त करने वाले अधिकारी ने प्रार्थना पत्र को पूरा पढ़े बिना ही संबंधित विभाग को कार्रवाई के आदेश दे दिए। युवक ने सीधे तौर पर बदलापुर का क्षेत्राधिकारी बनाए जाने की इच्छा जताई थी, जबकि आवेदन में वास्तविक उद्देश्य और आवश्यक विवरण पूरी तरह स्पष्ट नहीं थे।
इससे स्पष्ट है कि समाधान दिवस में किस प्रकार अधिकारी केवल औपचारिकता निभाते हैं |
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह लापरवाही न केवल समाधान दिवस की प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है, बल्कि यह यह भी दिखाती है कि कैसे कभी-कभी अधिकारी औपचारिकतावादी रवैये में फंस कर गंभीर मामलों को सही तरीके से नहीं पढ़ते और बिना जांच-पड़ताल के आदेश जारी कर देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान दिवस का मूल उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का त्वरित और न्यायपूर्ण समाधान करना है, लेकिन इस तरह की घटनाएं जनता में प्रशासन के प्रति असंतोष को जन्म देती हैं।
इस घटना से स्पष्ट होता है कि शिकायत निवारण के लिए अधिकारियों को अधिक सतर्क और जिम्मेदार रवैया अपनाना आवश्यक है।
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