NGV PRAKASH NEWS


बस्ती
01 अक्टूबर 2025
कैली अस्पताल: आशाओं से निराशा तक, मरीज फर्श पर और स्टाफ पर मारपीट के आरोप
पूर्वांचल के लोगों को कभी बड़ी उम्मीदें दिलाने वाला बस्ती का कैली अस्पताल (महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज) आज कुप्रबंधन, लापरवाही और अव्यवस्था का प्रतीक बन गया है।
ओपेक देशों की मदद से शुरू हुआ निर्माण
इस अस्पताल का निर्माण ओपेक देशों की मदद से हुआ था। उस समय बड़ी संख्या में पूर्वांचल के मजदूर खाड़ी देशों में काम करते थे। उनके परिवारों की सुविधा और स्थानीय गरीब मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने के लिए इस परियोजना की शुरुआत की गई। लेकिन राजनीति के चलते निर्माण आधा अधूरा ही रह गया। करीब 70 प्रतिशत काम के बाद निर्माण रुक गया और यहां लगने वाली मशीनों को लोगों के मुताबिक सैफई मेडिकल कॉलेज ट्रांसफर करा दिया गया। डॉक्टरों की नियुक्ति और स्टाफ की उपलब्धता भी अधूरी रह गई।
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी हालात जस के तस
जब इसे मेडिकल कॉलेज की मान्यता मिली और उम्मीदें जगीं कि गरीबों को बेहतर इलाज मिलेगा, तब भी हालात नहीं बदले। डॉक्टरों की कमी, स्टाफ का मनमाना रवैया और मरीजों की अनदेखी यहां की पहचान बन गई। कोरोना काल में तो हालात और बिगड़ गए। ऑक्सीजन की किल्लत और सिलेंडर बेचने के आरोपों ने अस्पताल की साख पूरी तरह गिरा दी।
डिलीवरी केस का फर्श पर इलाज
हाल ही में बस्ती के नगर पंचायत मुंडेरवां निवासी रीना (पत्नी विजय) का डिलीवरी केस लेकर 28 सितंबर 2025 को कैली अस्पताल पहुंचने पर परिवार को बताया गया कि “बेड खाली नहीं है”। मजबूरन रीना का इलाज जमीन पर बैठाकर किया गया, जबकि वह तीन दिनों से ब्लीडिंग की समस्या झेल रही थीं।
मरीज परिजन से हाथापाई, पत्रकार को गाली
30 सितंबर की रात करीब 2 बजे जब परिजनों ने अस्पताल का वीडियो बनाया तो तैनात गार्ड ने मोबाइल छीनने की कोशिश की, जिससे मरीज की पत्नी घायल हो गई। परिजनों के अनुसार मौके पर मौजूद डॉक्टर गाली-गलौज और हाथापाई पर उतारू हो गए और मेडिकल कॉलेज से 20-25 जूनियर डॉक्टरों को भी मारपीट के लिए बुला लिया गया। इतना ही नहीं, वहां मौजूद एक पत्रकार को भी गालियां दी गईं।
सुविधाओं के नाम पर झुनझुना
कैली अस्पताल की इमारत जरा सी बारिश में तालाब में बदल जाती है। मरीजों को न तो उचित बेड मिलते हैं और न ही स्टाफ का व्यवहार मरीजों के प्रति जिम्मेदाराना होता है। रात में ड्रेस कोड तक का पालन नहीं होता, जिससे मरीज यह पहचान ही नहीं पाते कि सामने डॉक्टर है या वार्ड ब्वॉय।
यह हाल उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाता है। गरीब मरीज अब भी बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर यहां आते हैं, लेकिन उन्हें मिलता है केवल निराशा, फर्श पर इलाज और स्टाफ का दुर्व्यवहार।
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