

NGV PRAKASH NEWS
छिंदवाड़ा, 02 अक्टूबर 2025
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक निर्दयी दंपत्ति ने अपने तीन दिन के नवजात को जंगल में पत्थर से दबाकर मौत के हवाले करने की कोशिश की। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी पिता सरकारी शिक्षक है और चौथे बच्चे के जन्म के बाद नौकरी छिनने के डर से उसने इतना अमानवीय कदम उठाया।
जंगल में मिला नवजात
धनोरा चौकी क्षेत्र के ग्राम नांदनवाड़ी में रविवार रात एक राहगीर ने पुलिस को सूचना दी कि रोड घाट के जंगल में पत्थरों के बीच एक नवजात शिशु पड़ा है। चौकी प्रभारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और शिशु को तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। बाद में हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
नौकरी खोने के डर से किया अपराध
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी दंपत्ति बबलू डांडोलिया और उसकी पत्नी राजकुमारी डांडोलिया ग्राम सिधौली थाना तामिया के निवासी हैं। दोनों अमरवाड़ा में रहकर ग्राम नांदनवाड़ी के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाते हैं। चौथे बच्चे के जन्म के बाद बबलू को डर था कि सरकारी नियमों के चलते उसकी नौकरी चली जाएगी। इसी भय के कारण उसने पत्नी के साथ मिलकर मासूम को जंगल में छोड़ने की साजिश रची।
पुलिस की कार्रवाई
अमरवाड़ा एसडीओपी कल्याणी बरकड़े ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शिशु को अस्पताल भिजवाया। वहीं, बटकाखापा टीआई अनिल राठौर ने बताया कि आरोपी बबलू ने पूछताछ में अपराध स्वीकार कर लिया है। उसके पहले से तीन बच्चे हैं—आठ, छह और चार साल के। आरोपी शिक्षक ने 2009 में नौकरी ज्वाइन की थी।
पुलिस ने दोनों माता-पिता को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। उनके खिलाफ 93 बीएनएस के साथ-साथ अब धारा 307 भी जोड़ी गई है।
मासूम की जिंदगी फिलहाल सुरक्षित
फिलहाल नवजात शिशु जिला अस्पताल में भर्ती है और चिकित्सकों की देखरेख में उसका इलाज जारी है। प्रशासन ने बच्चे की सुरक्षा और भविष्य को लेकर भी आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
यह घटना न केवल मानवता को झकझोरने वाली है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या सरकारी नियम-कायदों का भय इतना गहरा हो सकता है कि माता-पिता अपने ही खून को मौत के मुंह में धकेल दें।
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