पुलिस अपराधी गठ+जोड़ पार्ट 2 ::2 करोड़ के लूट में दो पुलिस भी शामिल…

NGV PRAKASH NEWS

2 करोड़ की लूटकांड में वर्दी पर दाग: आगरा के दो सिपाही निकले लुटेरों के साथी — एक गिरफ्तार, दूसरा सरेंडर

फिरोजाबाद। थाना मक्खनपुर क्षेत्र में 30 सितंबर को गुजरात की वित्तीय प्रबंधन कंपनी जीके के कर्मियों से हुई 2 करोड़ रुपये की सनसनीखेज लूटकांड में आगरा में तैनात दो सिपाहियों की संलिप्तता ने पुलिस महकमे को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर जहां पिता ने अपराध के खात्मे के लिए जान दी थी, वहीं बेटे ने अपराधियों से हाथ मिलाकर वर्दी को कलंकित कर दिया।

इस मामले में आगरा जीआरपी में तैनात मुख्य आरक्षी अंकुर प्रताप सिंह, निवासी हरदुआगंज, अलीगढ़ को पुलिस ने मंगलवार को रूपसपुर के पास श्याम फैमिली ढाबा से गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से पांच लाख रुपये की रकम बरामद की गई। वहीं, दूसरा आरोपी सिपाही मनोज कुमार, जो आगरा पुलिस लाइन में तैनात था और मक्खनपुर (फिरोजाबाद) का रहने वाला है, फरार होने के बाद देर रात शिकोहाबाद थाने में सरेंडर कर दिया। उसने भी अपराधियों से ली गई पांच लाख रुपये की रकम पुलिस को सौंप दी।

लुटेरों से मिलीभगत की गहरी साजिश

एसएसपी सौरभ दीक्षित के अनुसार, इस लूटकांड में ढेर हो चुके दुर्दांत लुटेरे नरेश उर्फ पंकज पंडित (निवासी अरनी, खैर, अलीगढ़) के गिरोह में शामिल मोनू उर्फ मिलाप (निवासी गढबढ जैतपुर, आगरा) के संपर्क में सिपाही मनोज कुमार था। ट्रांसयमुना थाने में तैनाती के दौरान मनोज ने मोनू को जेल भिजवाने में भूमिका निभाई थी, जिसके बाद दोनों में संपर्क बना रहा। मोनू के जरिए ही इन दोनों सिपाहियों की मुलाकात नरेश से डेढ़ माह पहले आगरा में उनके किराए के कमरे पर कराई गई थी, जहां लूट की योजना बनाई गई। दोनों सिपाहियों से वादा हुआ कि वे बदमाशों को पुलिस गतिविधियों की अंदरूनी जानकारी देंगे।

लूट के बाद दोनों सिपाही बदमाशों से नई दिल्ली जाकर मिले और मदद के एवज में पांच-पांच लाख रुपये की रकम ली। पुलिस ने अंकुर को दबोच लिया, जबकि मनोज गिरफ्तारी की भनक लगते ही फरार हो गया था, लेकिन देर रात थाने में सरेंडर कर दिया।

अंकुर का पारिवारिक इतिहास बना विडंबना

गिरफ्तार अंकुर प्रताप सिंह मूल रूप से अलीगढ़ के हरदुआगंज थाना क्षेत्र के खैर आलमपुर का निवासी है। उसके पिता गिरीश पाल सिंह आगरा में एसओजी में तैनात थे और वर्ष 2000 में दुर्दांत अपराधियों से मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। पिता ने जानकी जैसे अपराधियों को खत्म करने में अहम भूमिका निभाई थी। पिता की शहादत के बाद अंकुर को वर्ष 2011 में मृतक आश्रित कोटे से पुलिस में नौकरी मिली। लेकिन उसने उसी खाकी को कलंकित कर दिया, जिसके लिए उसके पिता ने बलिदान दिया था।

मनोज का भी पुलिस बैकग्राउंड

दूसरा आरोपी मनोज कुमार मूलरूप से औरैया का निवासी है। उसके पिता भी पुलिस में थे और फिरोजाबाद में तैनाती के दौरान मक्खनपुर क्षेत्र में घर बनवाया था, जहां उनका परिवार स्थायी रूप से बस गया। मनोज पहले एसओजी में तैनात था और एक महिला के छत से गिरने के मामले में एक महीने पहले निलंबित भी हुआ था।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने खोला राज़

शुरुआत में जब मोनू ने पुलिस को बताया कि दो सिपाही भी लूट में शामिल हैं, तो पुलिस को शक हुआ। एसएसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने मोबाइल नंबरों की सीडीआर और लोकेशन खंगाली। जांच में पाया गया कि वारदात के दौरान और बाद में दोनों सिपाहियों की बातचीत मोनू और नरेश से होती रही। मोबाइल लोकेशन नई दिल्ली में मिली। सीसीटीवी फुटेज, आसपास के लोगों और सहकर्मियों के बयानों से पूरी कहानी सामने आ गई।

लूटकांड की टाइमलाइन

  • 30 सितंबर: सुबह 5 बजे मक्खनपुर बाईपास पर 2 करोड़ की लूट।
  • 4 अक्टूबर: छह शातिर लुटेरे गिरफ्तार, 1.05 करोड़ रुपये, आईफोन और हथियार बरामद।
  • 5 अक्टूबर: मुख्य आरोपी नरेश हथकड़ी सहित फरार, 50 हजार का इनाम घोषित।
  • उसी रात नरेश मुठभेड़ में घायल होकर मारा गया।
  • 7 अक्टूबर: सिपाही अंकुर की गिरफ्तारी, पांच लाख की बरामदगी।
  • मनोज कुमार ने देर रात थाने में सरेंडर कर दी।

इस पूरे खुलासे ने वर्दी की साख पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। जिन पर कानून की रक्षा की जिम्मेदारी थी, वे खुद अपराधियों के सहयोगी बन बैठे।

NGV PRAKASH NEWS

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *