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परशुरामपुर पुलिस के विरुद्ध पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष का धरना समाप्त, पूरे मामले में कई पहलुओं पर उठे सवाल
बस्ती।
थाना परशुरामपुर क्षेत्र से जुड़ा एक मामला पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में है। एक ऑटो चालक की पिटाई और लूट के मामले में पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राम सुमेर यादव ने जिलाधिकारी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था, जो दो दिन बाद 14 अक्टूबर की शाम को समाप्त हो गया।
मामला ग्राम रिधौरा चौकी घघौआ निवासी मनोज कुमार से जुड़ा है, जो अपनी आजीविका चलाने के लिए बस्ती और अयोध्या के बीच ऑटो चलाते हैं। मनोज ने अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि रास्ते में कुछ दबंग किस्म के लोग उनसे आए दिन नशे के लिए पैसा मांगते थे। एक दिन जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया, तो लौटते समय उन लोगों ने कथित रूप से धारदार हथियार से उन पर हमला कर दिया और लूटपाट की। गंभीर रूप से घायल मनोज ने निजी अस्पताल में इलाज कराया और चौकी घघौआ प्रभारी को प्रार्थना पत्र दिया, लेकिन कथित रूप से उन्हें उचित पुलिस सहायता नहीं मिली।
आरोप है कि चौकी प्रभारी ने मामले में दबंगों के दबाव में हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। सूत्रों के अनुसार चौकी का एक कर्मचारी मनोज को उकसाने में शामिल था। उसने थाना अध्यक्ष परशुरामपुर भानु प्रताप सिंह के नाम पर कुछ रुपये भी लिए और बाद में कहा कि थाना अध्यक्ष उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं कर रहे हैं। हालांकि वास्तविकता यह रही कि चौकी प्रभारी द्वारा जिन धाराओं में मुकदमा लिखा गया, वही धाराएं थाने में पंजीकृत हुईं और विवेचना की जिम्मेदारी भी चौकी प्रभारी के पास ही रही।
इस पूरे प्रकरण को लेकर पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष राम सुमेर यादव ने 13 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। 14 अक्टूबर की शाम प्रशासनिक बातचीत के बाद धरना समाप्त हुआ।
थाना अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने दूरभाष पर बताया कि “मामले में चौकी प्रभारी द्वारा मुकदमा पहले ही दर्ज कर लिया गया था। मैं इसकी विवेचना नहीं कर रहा हूं और मुझ पर लगाए गए पैसों के लेनदेन के आरोप पूरी तरह झूठे हैं।”
वहीं जब आयोग अध्यक्ष राम सुमेर यादव से पूछा गया कि क्या उन्होंने थाना अध्यक्ष से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली है, तो उन्होंने “ना” में जवाब दिया।
पूरा मामला फिलहाल कई सवाल खड़े कर रहा है — एक ओर पीड़ित मनोज कुमार की शिकायत को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, तो दूसरी ओर चौकी घघौआ प्रभारी की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत होती है। अब देखना होगा कि प्रशासनिक जांच में किन तथ्यों का खुलासा होता है।
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