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मुंबई पवई किडनैपिंग मामला — पुलिस की साहसिक कार्रवाई: 6 दिन में बंधक बनाए गए 17 बच्चों को छुड़ाया, आतंरिक भूकंप जैसा खुलासा
मुंबई, 30 अक्टूबर 2025 | NGV PRAKASH NEWS
मुंबई के पवई इलाके से जुड़ा किडनैपिंग मामला अब फिल्मी कहानी जैसा खुला है। पुलिस ने रोहित आर्या नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसने कथित तौर पर छह दिनों के दौरान 17 बच्चों को बंधक बनाकर अपने स्टूडियो में रखा था। तेज़ और जोखिमभरा ऑपरेशन कर बच्चों को बचाया गया, गिरफ्तार आरोपी गोली लगने से घायल होकर अस्पताल में इलाज केतहत है। घटना और कार्रवाई के कई पहलू सामने आ रहे हैं — आइए मामले की हर कड़ी क्रमवार तरीके से जानें।
क्या हुआ — घटनाक्रम का सार
पुलिस को रात लगभग 1:45 बजे सूचना मिली कि पवई के एक स्टूडियो/कमर्शियल स्थल पर बच्चे बंधक बनाए गए हैं और वहीं मौजूद शख्स ने एक वीडियो जारी कर धमकी भरे बयान दिए हैं। सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस व क्विक रेस्पॉन्स टीम (QRT) तुरंत मौके पर पहुंची और चारों तरफ क्षेत्र को घेर कर बचाव व छानबीन शुरू की।
सुरक्षाबलों ने सूझबूझ से कार्रवाई करते हुए अंदर से फंसे बच्चों को निकालने के लिए बाथरूम के मार्ग का इस्तेमाल किया और क्रमश: सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस ऑपरेशन के दौरान आरोपी को पकड़ने की कोशिश में पुलिस की जवाबी कार्रवाई हुई — आरोपी घायल हुआ और नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बन्धक बनाए गए बच्चों की संख्या व ढांचा
पुलिस की प्रारम्भिक पूछताछ और जांच के अनुसार आरोपी ने बच्चों को ऑडिशन के बहाने स्टूडियो में बुलाया था। शुरुआती दावों में आरोपी ने करीब 100 बच्चों को ऑडिशन के बहाने बुलाने का जिक्र किया; इनमें से पुलिस ने बताया कि आरोपी ने 17 बच्चों को चुनकर अलग स्थानों पर बंद रखा था। पुलिस ने कुल 19 लोगों (बच्चे व अन्य) को सुरक्षित छुड़ाया है — इनमें बंधक बनाए गए बच्चे और कुछ अन्य सहयोगी/लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
आरोपी के बयान व बरामदगी
अभियुक्त द्वारा सोशल मीडिया पर डाले गए वीडियो में उसने दावा किया कि वह कुछ लोगों से बातचीत चाहता है और न मिलने पर वह व बच्चों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहा था। मौके से एक हथियार और एक एयर गन बरामद हुआ है; फॉरेंसिक टीम इनकी असलियत की जांच कर रही है। पुलिस ने प्रारम्भिक तौर पर आरोपी को मानसिक रूप से अस्थिर बताया है और आगे की मेडिकल/मनोवैज्ञानिक जाँच चल रही है।
ऑपरेशन की तकनीकी जानकारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बचाव टीम ने पहले बाथरूम के रास्ते से अंदर घुसकर बच्चों को सुरक्षित निकाला—यह कदम तेज़, सटीक और जोखिमभरा था। इस दौरान संलिप्त व्यक्तियों की पहचान और संभावित भागीदारों की जांच के लिए उसी समय मौका-ए-वारदात पर तलाशी और पूछताछ भी शुरू कर दी गई।
बच्चों की सेहत और परिजनों के साथ मिलान
सभी बचाए गए बच्चों को तुरंत प्राथमिक चिकित्सा देकर उनके परिजनों के हवाले किया गया। बच्चों की मानसिक स्थिति के दृष्टिगत मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग की व्यवस्था करने की भी जानकारी दी गई है। पुलिस ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा व पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
जांच की दिशा — नेटवर्क, ऑडिशन दावे और कानूनी धाराएं
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपी अकेला था या उसके साथ और लोग भी थे।
- किस तरह ऑडिशन का प्रलोभन दिया गया और कितने परिवार प्रभावित हुए;
- क्या आरोपी का किसी तरह का क्रिमिनल नेटवर्क या कमर्शियल स्टूडियो—ऑडिशन कवर में चल रही गतिविधि से संबंध है;
- बरामद हथियार की असलियत तथा आरोपी के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े चिकित्सकीय निष्कर्ष।
मौके पर जुटी फॉरेंसिक टीम, सायबर सेल और बाल संरक्षण इकाइयां मिलकर जांच कर रही हैं। आरोपों के आधार पर आवश्यक गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।
पुलिस की अपील व प्रशासनिक कदम
पुलिस ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने से जनता को रोकने की अपील की है और कहा है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी तथ्य सार्वजनिक किए जा रहे हैं। साथ ही प्रशासन ने बच्चों के मानसिक व शारीरिक उपचार तथा पारिवारिक सहायता के लिए सहायक संस्थाओं को जोड़ा है।
व्यावहारिक चिंता और समाजिक प्रश्न
यह घटना न केवल आपराधिक प्रकृति की है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, ऑडिशन/कास्टिंग जैसे लालच देने वाली पद्धतियों और कमर्शियल सेटिंग्स में पारदर्शिता के सवाल भी उठाती है। मीडिया और प्रशासन से अपेक्षा है कि वे सतर्कता बढ़ाएं, स्थानीय स्तर पर अज्ञात ऑडिशन/कास्टिंग कॉल्स की मॉनिटरिंग करें और परिवारों को ऐसे फसाने से बचाने के लिए जागरूकता अभियान तेज करें।
पुलिस की जांच जारी है। जैसे-जैसे मामले के और तथ्य सामने आएंगे, रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।
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