बिहार चुनाव 25: ऐसी सीटें जहां हुआ रोचक मुकाबला मुकाबला..

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बिहार चुनाव 2025: एनडीए की ऐतिहासिक जीत के बीच कई सीटों पर बेहद रोमांचक मुकाबला

पटना, 15 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग स्पष्ट हो चुके हैं और इस बार राज्य की राजनीतिक तस्वीर ने बड़ा फेरबदल दिखाया है। एनडीए ने 200 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर प्रचंड बहुमत हासिल किया है, जबकि महागठबंधन 50 का आंकड़ा भी पार नहीं कर सका। चुनाव में जहां कई सीटों पर भारी अंतर से जीत मिली, वहीं कुछ विधानसभा क्षेत्रों में मुकाबला इतना कड़ा था कि हार-जीत का फैसला कुछ दर्जन या कुछ सौ वोटों से तय हुआ।

चुनाव आयोग के आंकड़ों और ज़मीनी रिपोर्टों के मुताबिक सबसे कम मार्जिन वाली जीत संदेश सीट पर दर्ज हुई, जहां जेडीयू के रामचरण साह सिर्फ 27 वोटों से विजयी रहे। उन्हें कुल 80,598 वोट मिले, जबकि आरजेडी के दीपू सिंह को 80,571 वोट प्राप्त हुए। इस सीट पर जनसुराज पार्टी वोटकटवा साबित हुई, जिसने 6,040 वोट अपने खाते में जोड़े और मुकाबले को और अधिक रोमांचक बना दिया।

इसी तरह अगिआंव सीट पर बीजेपी के महेश पासवान ने बेहद कठिन मुकाबले में 95 वोटों से जीत दर्ज की। पासवान को 69,412 वोट, जबकि सीपीआई (एमएल) के शिव प्रकाश रंजन को लगभग बराबरी के 69,317 वोट मिले।

बलरामपुर सीट पर एलजेपी (रामविलास) की संगीता देवी ने 389 वोटों के अंतर से AIMIM के मोहम्मद आदिल हुसैन को हराया। संगीता देवी को 80,459 वोट प्राप्त हुए और यह जीत पार्टी के लिए उत्साहजनक रही।

बख्तियारपुर में एलजेपी (रामविलास) के अरुण कुमार ने 981 वोटों से आरजेडी प्रत्याशी अनिरुद्ध कुमार को मात दी। अरुण कुमार को 88,520, जबकि अनिरुद्ध को 87,539 वोट मिले। वहीं बोधगया सीट पर आरजेडी के कुमार सर्वजीत ने 881 वोटों से जीत दर्ज की। उन्होंने एलजेपी (रामविलास) के श्यामदेव पासवान को कड़े मुकाबले में पीछे छोड़ते हुए 1,00,236 बनाम 99,355 वोटों से जीत हासिल की।

चनपटिया सीट पर कांग्रेस के अभिषेक रंजन ने 602 वोटों से बीजेपी प्रत्याशी उमाकांत सिंह को हराया। अभिषेक को 87,538, जबकि उमाकांत को 86,936 वोट मिले। वहीं ढाका सीट पर आरजेडी के फैसल रहमान ने मात्र 178 वोटों के अंतर से जीत पाई। रहमान को 1,12,727 वोट, जबकि बीजेपी के पवन कुमार जैसवाल को 1,12,549 वोट मिले। यह इस चुनाव की सबसे कांटे की टक्कर वाली सीटों में से एक रही।

फारबिसगंज सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी मनोज विश्वास ने 221 वोटों से जीत दर्ज की। मनोज विश्वास को 1,20,114, जबकि बीजेपी के विद्या सागर केशरी को 1,19,893 वोट मिले।

बिहार चुनाव 2025: बेहद कम अंतर से जीतने वाले उम्मीदवार — बिंदुवार सूची

सबसे कम मार्जिन से जीत

  • जेडीयू के रामचरण साह (संदेश सीट)
    • जीत का अंतर: 27 वोट
    • मिले वोट: 80,598
    • पराजित उम्मीदवार: आरजेडी के दीपू सिंह

अन्य सीटों पर नजदीकी मुकाबले

  • रामगढ़ सीट — बसपा के सतीश कुमार
    • जीत का अंतर: 30 वोट
    • मिले वोट: 72,689
    • पराजित: बीजेपी के अशोक कुमार सिंह
  • अगिआंव सीट — बीजेपी के महेश पासवान
    • जीत का अंतर: 95 वोट
    • मिले वोट: 69,412
    • पराजित: सीपीआई (एमएल) के शिव प्रकाश रंजन
  • नबीनपुर सीट — जेडीयू के चेतन आनंद
    • जीत का अंतर: 112 वोट
    • मिले वोट: 80,380
    • पराजित: आरजेडी के अमोद कुमार सिंह
  • ढाका सीट — आरजेडी के फैसल रहमान
    • जीत का अंतर: 178 वोट
    • मिले वोट: 1,12,727
    • पराजित: बीजेपी के पवन कुमार जैसवाल
  • फारबिसगंज सीट — कांग्रेस के मनोज विश्वास
    • जीत का अंतर: 221 वोट
    • मिले वोट: 1,20,114
    • पराजित: बीजेपी के विद्या सागर केशरी
  • बलरामपुर सीट — एलजेपी (आर) की संगीता देवी
    • जीत का अंतर: 389 वोट
    • मिले वोट: 80,459
    • पराजित: AIMIM के मोहम्मद आदिल हुसैन
  • चनपटिया सीट — कांग्रेस के अभिषेक रंजन
    • जीत का अंतर: 602 वोट
    • मिले वोट: 87,538
    • पराजित: बीजेपी के उमाकांत सिंह
  • जहानाबाद सीट — आरजेडी के राहुल कुमार
    • जीत का अंतर: 793 वोट
    • मिले वोट: 86,402
    • पराजित: जेडीयू के चंदेश्वर प्रसाद
  • बोधगया सीट — आरजेडी के कुमार सर्वजीत
    • जीत का अंतर: 881 वोट
    • मिले वोट: 1,00,236
    • पराजित: एलजेपी (आर) के श्यामदेव पासवान
  • बख्तियारपुर सीट — एलजेपी (आर) के अरुण कुमार
    • जीत का अंतर: 981 वोट
    • मिले वोट: 88,520
    • पराजित: आरजेडी के अनिरुद्ध कुमार

राज्य की कुछ सीटों—जैसे जेहानाबाद, नबीनगर और रामगढ़—पर अब भी कड़ी टक्कर जारी है और अंतिम रुझानों का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि समग्र तस्वीर स्पष्ट है कि एनडीए ने सामाजिक समीकरण, सटीक रणनीति और संगठित प्रचार के दम पर भारी जनादेश प्राप्त किया है, जबकि महागठबंधन को इस चुनाव में बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है।

बिहार की राजनीति में आए इस बड़े बदलाव ने आगामी वर्षों की दिशा तय कर दी है, और विशेषज्ञों का मानना है कि संकरे अंतर से मिली जीतें आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरणों को और अधिक दिलचस्प बना देंगी।

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