

NGV PRAKASH NEWS
नाबालिगों की लापरवाही और अभिभावकों की चूक ने ली तीन मासूम जिंदगियाँ
यातायात माह जागरूकता अभियान के बीच बड़ा हादसा, इलाके में मातम का माहौल
गाजियाबाद 16 नवंबर 25–
गाजियाबाद के NH-9 पर शनिवार -रविवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें तेज रफ्तार बाइक खड़े ट्रॉले में जा घुसी। इस भीषण दुर्घटना में तीन नाबालिग लड़कों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा न सिर्फ तेज रफ्तार की भयावहता को दिखाता है, बल्कि अभिभावकों की उस गंभीर लापरवाही को भी उजागर करता है, जिसमें वे अपने नाबालिग बच्चों को बाइक थमा देते हैं।
हादसा रात लगभग 12 बजे के आसपास हुआ, जब तीनों किशोर बिना हेलमेट पहने NH-9 पर बाइक दौड़ा रहे थे। तभी सामने खड़े ट्रॉले से बाइक इतनी जोर से टकराई कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।
यातायात माह चल रहा, फिर भी नियमों की अनदेखी जारी
प्रदेशभर में ‘यातायात माह जागरूकता अभियान’ लगातार चलाया जा रहा है। पुलिस द्वारा हेलमेट, सीट बेल्ट और ट्रैफिक नियमों को लेकर जगह-जगह लोगों को जागरूक किया जा रहा है। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं।
इसके बावजूद भीड़भाड़ वाले बाज़ारों से लेकर हाइवे तक, बड़ी संख्या में नाबालिगों को बिना लाइसेंस और बिना हेलमेट तेज रफ्तार में बाइक चलाते देखा जा रहा है। माता-पिता भी अक्सर बच्चों के बार-बार कहने पर उन्हें बाइक पकड़ा देते हैं—यह सोचकर कि “थोड़ा चला लेगा”, लेकिन यही थोड़ी सी छूट अक्सर परिवारों को उम्रभर का दर्द दे जाती है।
अभिभावकों की बड़ी चूक: नाबालिक बच्चे को बाइक देना अपराध
पुलिस के मुताबिक नाबालिगों को वाहन देना कानूनी अपराध है। इसके तहत वाहन स्वामी और अभिभावक दोनों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
इसके बावजूद कई माता-पिता बच्चों को यह कहकर दोपहिया वाहन थमा देते हैं कि “ध्यान से चलाना।”
लेकिन NH-9 का हादसा एक बार फिर साबित करता है कि लापरवाही हमेशा महंगी पड़ती है।
मोहल्ले में पसरा मातम, परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल
तीनों लड़कों की मौत से उनके मोहल्ले में मातम छा गया है। मृतकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। किसी ने अपने बेटे को पढ़ाई के लिए बाहर भेजा था, किसी ने सोचा था कि बच्चा थोड़ी देर में लौट आएगा।
लेकिन एक पल की गलती ने तीन परिवारों की खुशियाँ छीन लीं।
क्षेत्रीय पुलिस जुटी जांच में
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। ट्रॉले के चालक से पूछताछ की जा रही है और हादसे के समय की सटीक परिस्थिति का भी पता लगाया जा रहा है।
समाज के लिए बड़ा सबक
इस दुर्घटना ने एक बार फिर यातायात नियमों की अनदेखी के गंभीर परिणाम सामने रख दिए हैं।
नाबालिगों को बाइक चलाने से रोकना सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर अभिभावक की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
यदि जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद बच्चे सड़क पर जोखिम उठाते हैं, तो इसका बड़ा कारण अभिभावकों की नरमी और समाज में फैली लापरवाही है।
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