बच्चों के पेट में भी होता है माइग्रेन – जाने कारण और निवारण…

Gyan Prakash Dubey

बच्चों के पेट में भी होता है माइग्रेन: जानिए कैसा दिखता है ‘एब्डॉमिनल माइग्रेन’ और कैसे पहचानें

अक्सर हम माइग्रेन को सिरदर्द से जोड़कर देखते हैं, लेकिन चिकित्सा विज्ञान बताता है कि माइग्रेन सिर्फ सिर में ही नहीं होता। कई बच्चों को पेट में माइग्रेन होता है, जिसे मेडिकल भाषा में एब्डॉमिनल माइग्रेन (Abdominal Migraine) कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे बार-बार तेज पेट दर्द की शिकायत करते हैं, लेकिन जांच कराने पर किसी संक्रमण, गैस, अल्सर या पाचन संबंधी बीमारी के लक्षण नहीं मिलते।

👉क्या होता है एब्डॉमिनल माइग्रेन?

एब्डॉमिनल माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो मुख्य रूप से 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में दिखाई देती है। इसमें बच्चे को पेट में तेज, बार-बार होने वाला दर्द, उलटी जैसा मन होना, भूख न लगना और कमजोरी महसूस होती है।
दरअसल यह सिर वाले माइग्रेन का ही एक रूप है, लेकिन दर्द का केंद्र पेट होता है।

कैसे पहचानें पेट का माइग्रेन? मुख्य लक्षण

एब्डॉमिनल माइग्रेन का सबसे बड़ा कारण यह है कि इसके लक्षण आम पेट दर्द जैसे लगते हैं। लेकिन इसके खास संकेत हैं:

  1. पेट के बीच वाले हिस्से में तेज दर्द

दर्द ज्यादातर नाभि के आसपास होता है और कई बार 1-72 घंटे तक रह सकता है।

  1. मिचली और उलटी जैसा महसूस होना

बच्चा बार-बार उलटी आने या पेट भारी होने की शिकायत करता है।

  1. चेहरा पीला पड़ जाना या कमजोरी

दर्द के साथ बच्चे थकान, सुस्ती और कमजोरी महसूस करते हैं।

  1. भूख न लगना

बच्चा खाने से परहेज करता है या भोजन देखकर उलटी जैसा लगता है।

  1. दर्द बिना किसी मेडिकल कारण के बार-बार लौटना

रिपोर्ट्स सामान्य आती हैं, लेकिन दर्द हर कुछ हफ्ते या महीनों में दोहराता है।

क्यों होता है बच्चों को पेट में माइग्रेन? संभावित कारण

चिकित्सा विशेषज्ञ इसके पीछे कई कारण बताते हैं:

  1. आनुवंशिक कारण

जिन बच्चों के परिवार में माइग्रेन की हिस्ट्री होती है, उनमें एब्डॉमिनल माइग्रेन की संभावना अधिक होती है।

  1. असंतुलित न्यूरोट्रांसमीटर

सेरोटोनिन और अन्य न्यूरोट्रांसमीटर के उतार-चढ़ाव से पेट और दिमाग के बीच सिग्नल गड़बड़ा जाते हैं।

  1. तनाव या भावनात्मक दबाव

परीक्षा, स्कूल का दबाव, पारिवारिक तनाव—ये सब पेट माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं।

  1. खान-पान से जुड़े कारण

चॉकलेट, फास्ट फूड, अधिक तला-भुना खाना, पैकेट स्नैक्स और कैफीन बच्चों में माइग्रेन के आम ट्रिगर हैं।

  1. नींद की कमी

बच्चों के दिमाग को पर्याप्त आराम न मिलने से माइग्रेन के अटैक बढ़ते हैं।

👉क्या यह सामान्य पेट दर्द से अलग है?

हाँ—एब्डॉमिनल माइग्रेन किसी भी संक्रमण के बिना होता है।
इसमें:

बुखार नहीं होता

दस्त या कब्ज नहीं होता

पेट छूने पर कोई सख्त गाठ या दर्द वाली जगह नहीं मिलती

दर्द अचानक आता है और ठीक उसी तरह अचानक चला भी जाता है—यह इसकी खास पहचान है।

👉बच्चों में पेट माइग्रेन का इलाज कैसे होता है?

इलाज दो भागों में होता है—लक्षणों में राहत और ट्रिगर कंट्रोल।

  1. मेडिकल इलाज

डॉक्टर आमतौर पर माइग्रेन को नियंत्रित करने वाली दवाएँ देते हैं, जैसे—

डोमपेरिडोन या ओन्डैनसेट्रॉन (उलटी रोकने के लिए)

पैरासिटामोल या आइबूप्रोफेन (दर्द कम करने के लिए)

कुछ मामलों में माइग्रेन-प्रिवेंशन मेडिसिन

  1. घरेलू और लाइफस्टाइल उपाय

बच्चे को पूरी नींद दिलाना

हेल्दी और टाइम पर भोजन देना

प्रोसेस्ड और जंक फूड कम करना

मानसिक तनाव कम करना

दर्द के दौरान शांत वातावरण में आराम कराना

  1. ट्रिगर डायरी बनाना

किस बच्चे का माइग्रेन किस वजह से ट्रिगर होता है, यह समझने के लिए माता-पिता एक फूड और एक्टिविटी डायरी रखते हैं। इससे दोहराव वाले कारण जल्दी पकड़ में आते हैं।

👉क्या पेट का माइग्रेन गंभीर है?

एब्डॉमिनल माइग्रेन खतरनाक नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज करने से बच्चे बार-बार दर्द में रहते हैं, स्कूल मिस करते हैं और मानसिक तनाव बढ़ता है।
अच्छी बात यह है कि यह स्थिति उम्र के साथ सामान्यतः ठीक हो जाती है—लेकिन कई बच्चों में आगे चलकर सिर वाले माइग्रेन विकसित हो सकते हैं।

⏩माता-पिता क्या करें?

👉बच्चे के दर्द को हल्के में न लें

बार-बार दर्द होने पर बाल रोग विशेषज्ञ या न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाएँ

हर दर्द को गैस, खराब खाना या पेट दर्द समझकर दवा न दें

👉बच्चे की डाइट और रूटीन संतुलित रखें

बच्चों का पेट दर्द हमेशा सामान्य नहीं होता। कई बार यह एब्डॉमिनल माइग्रेन जैसा गंभीर न्यूरोलॉजिकल कारण भी हो सकता है। यदि बच्चे को बार-बार तेज, अनसुलझा पेट दर्द होता है, तो सही जांच और इलाज से भविष्य के माइग्रेन जोखिम को कम किया जा सकता है और बच्चा मानसिक-शारीरिक रूप से बेहतर रह सकता है।

Dr. A. K. Dubey

(मानसिक एवं न्यूरोरोग )

से बातचीत पर आधारित..

NGV PRAKASH NEWS

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