50 साल से नहीं सोया शख्स-फिर भी है स्वस्थ : चिकित्सा विज्ञान भी है हैरान…….

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50 साल से नहीं सोया यह शख्स, फिर भी पूरी तरह स्वस्थ, डॉक्टर भी हैरान

रीवा, 16 जनवरी 2026 —
कहा जाता है कि बिना नींद के जीवन संभव नहीं है। शरीर और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए नींद को सबसे जरूरी माना जाता है। लेकिन मध्य प्रदेश के रीवा में एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसने विज्ञान और चिकित्सा जगत को भी हैरानी में डाल दिया है। यहां एक व्यक्ति ऐसा है, जिसने पिछले करीब 50 वर्षों से नींद नहीं ली, फिर भी वह पूरी तरह स्वस्थ है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रीवा के रहने वाले रिटायर्ड ज्वाइंट कलेक्टर मोहन लाल द्विवेदी की उम्र लगभग 75 साल है। उनका दावा है कि उन्होंने आखिरी बार इमरजेंसी के दौर में चैन की नींद ली थी। उसके बाद से आज तक उन्हें नींद नसीब नहीं हुई। हालात यह हैं कि पलकें तो बंद हो जाती हैं, लेकिन आंखों में नींद नहीं आती। न झपकी, न गहरी नींद—पिछले पांच दशकों से उनकी आंखों से नींद जैसे पूरी तरह गायब हो चुकी है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नींद न लेने के बावजूद मोहन लाल पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्हें न थकान महसूस होती है, न कमजोरी और न ही मांसपेशियों में दर्द। वह घंटों एक ही मुद्रा में बैठ सकते हैं और लगातार लंबे समय तक काम करने की क्षमता रखते हैं। मोहन लाल बताते हैं कि रात में वह लेट तो जाते हैं, लेकिन नींद नहीं आती। ऐसे में किताबें पढ़ते हैं या टहलते रहते हैं। धीरे-धीरे यही उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या बन गई है।

नौकरी के दौरान उनकी कार्यशैली हमेशा चर्चा में रहती थी। अधीनस्थ कर्मचारी उनके साथ काम करने से घबराते थे, क्योंकि वह लगातार कई-कई घंटों तक बिना रुके काम करते रहते थे। बाणसागर बांध परियोजना के समय वह कई किलोमीटर पैदल चलते थे, फिर भी थकान का नामोनिशान नहीं होता था।

नींद न आने की समस्या को लेकर उन्होंने मुंबई और दिल्ली के बड़े-बड़े डॉक्टरों से परामर्श लिया। योग, प्राणायाम से लेकर तमाम तरह के उपचार आजमाए, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इसके बावजूद उनके स्वास्थ्य पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा। मोहन लाल कहते हैं कि शुरुआत में यह समस्या उन्हें परेशान करती थी, लेकिन अब यह उनकी आदत बन चुकी है।

पचास साल बिना नींद के जीवन गुजारना अपने आप में एक बड़ा रहस्य है। चिकित्सा विज्ञान के लिए भी यह मामला आज तक अनसुलझा बना हुआ है। डॉक्टरों के लिए यह घटना किसी चुनौती से कम नहीं, वहीं आम लोगों के लिए यह किसी अजूबे से कम नहीं लगती।

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