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लोकसभा में पारित हुआ जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026
नई दिल्ली, 31 जुलाई 2026।
संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को भी विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही प्रभावित रही। इस बीच लोकसभा ने भारी शोर-शराबे के बीच जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 को बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया।
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर नारेबाजी करते हुए अध्यक्ष के आसन के सामने पहुंच गए। लगातार व्यवधान के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष से प्रश्नकाल चलने देने की अपील की और कहा कि प्रश्नकाल सरकार की जवाबदेही तय करने का सबसे प्रभावी माध्यम है, लेकिन विपक्ष इसे बाधित कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद परिसर में अलग-अलग वेशभूषा में प्रदर्शन कर सदन की गरिमा प्रभावित की जा रही है। हंगामे के चलते कार्यवाही दोपहर तक स्थगित करनी पड़ी।
दोपहर में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह को सदन में बुलाने की मांग की। इसी दौरान सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 पर चर्चा और पारित कराने का प्रस्ताव रखा। लगातार हंगामे के बीच विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा कराना चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने चर्चा में भाग लेने के बजाय हंगामा करना उचित समझा। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जनता अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से इसका जवाब मांगेगी।
उधर, राज्यसभा में भी विपक्ष के विरोध के कारण कोई विधायी कार्य नहीं हो सका। छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर विपक्षी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। लगातार व्यवधान के बीच सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।
क्या बदलेगा नए संशोधन से?
जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026 का उद्देश्य समय पर जन्म और मृत्यु का पंजीकरण सुनिश्चित करना तथा लंबे समय बाद होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सख्त बनाना है।
नए प्रावधानों के अनुसार:
- दो वर्ष से अधिक की देरी से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए अब प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होगी।
- एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक की देरी वाले मामलों में पहले की तरह जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश से पंजीकरण कराया जा सकेगा।
- संशोधन का उद्देश्य फर्जी पंजीकरण पर रोक लगाना और अभिलेखों की विश्वसनीयता बढ़ाना बताया गया है।
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