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यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, फिलहाल 2012 के नियम ही रहेंगे लागू
नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026.
सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के हाल ही में जारी नए नियमों पर फिलहाल रोक लगाते हुए स्पष्ट किया है कि 2012 में बनाए गए यूजीसी नियम ही प्रभावी बने रहेंगे। यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर संक्षिप्त सुनवाई के बाद शीर्ष न्यायालय ने कहा कि इस मामले से जुड़े कुछ संवैधानिक और कानूनी सवालों की अभी गहन जांच की जानी बाकी है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि नए नियमों में अस्पष्टता दिखाई देती है और इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि अदालत के समक्ष विशेषज्ञों की एक समिति गठित करने का सुझाव रखा जाए, जो इन नियमों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर सके। साथ ही अदालत ने यूजीसी को निर्देश दिया कि वह याचिकाओं पर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करे।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि यूजीसी के नए नियम कुछ सामाजिक समूहों को अलग-थलग करने वाले हैं और इससे उच्च शिक्षण संस्थानों में असमानता बढ़ सकती है। मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी में यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि नए नियमों का मसौदा तैयार करते समय कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। उस दिन इस याचिका को रोहित वेमुला की मां की ओर से 2012 के यूजीसी नियमों को चुनौती देने वाली याचिका के साथ सुना जाएगा।
गौरतलब है कि यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव से निपटने के उद्देश्य से नए संशोधित नियम जारी किए थे, जिनका देशभर में व्यापक विरोध हुआ। नए नियमों में ‘भेदभाव’ की परिभाषा का विस्तार करते हुए ‘जाति-आधारित भेदभाव’ को विशेष रूप से शामिल किया गया है, जिसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के सदस्यों के विरुद्ध किए जाने वाले भेदभाव के रूप में परिभाषित किया गया है।
इन नियमों के तहत प्रत्येक विश्वविद्यालय और कॉलेज में समान अवसर केंद्र स्थापित करने का प्रावधान किया गया है, जो वंचित समुदायों से जुड़े मामलों, परामर्श सेवाओं, विविधता को बढ़ावा देने और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाएगा। साथ ही हर संस्थान में एक समता समिति और चौबीसों घंटे उपलब्ध समता हेल्पलाइन शुरू करने का भी प्रावधान है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा आदेश के बाद इन नए प्रावधानों के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक बनी रहेगी।
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