एफआईआर कैसे दर्ज कराएं: पूरी कानूनी प्रक्रिया आसान रूप में……

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एफआईआर कैसे दर्ज कराएं: पूरी कानूनी प्रक्रिया आसान रूप में

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अपने देश में किसी भी आपराधिक घटना की जानकारी पुलिस को देने के लिए एफआईआर यानी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराना जरूरी होता है।

एफआईआर दर्ज होने के बाद ही पुलिस कानूनी जांच शुरू करती है और मुकदमों में उपयुक्त धाराओं को संलग्न करती है।

आम लोगों में आज भी यह भ्रम रहता है कि एफआईआर कैसे और कहां दर्ज कराई जाए।

किसी भी संज्ञेय अपराध जैसे चोरी, मारपीट, बलात्कार, हत्या या धोखाधड़ी की स्थिति में पीड़ित या उसके परिजन या कोई भी जानकारी रखने वाला व्यक्ति या उसका रिश्तेदार नजदीकी थाने में जाकर एफआईआर दर्ज करा सकता है।

थाने में मौजूद ड्यूटी अफसर को मौखिक या लिखित शिकायत दी जा सकती है। पुलिस को शिकायतकर्ता का बयान सुनकर उसे लिखित रूप में दर्ज करना होता है और शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर लेने के बाद उसकी एक प्रति नि:शुल्क देनी अनिवार्य है।

यदि पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करने से मना करती है, तो उस स्थिति में शिकायतकर्ता उस जिले के पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत भेज सकता है या खुद जाकर दे सकता है।

यहां बता दे की प्रत्येक कर दिवस को सुबह 10:00 बजे से 12:00 पुलिस अधिकारी जनसुनवाई कर लोगों की समस्याओं को सुनते हैं और उनके निस्तारण के लिए संबंधित को निर्देश देते हैं |

इसके अलावा राज्य सरकार की ऑनलाइन एफआईआर सुविधा या 112 नंबर के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। एफआईआर दर्ज कराते समय घटना का समय, स्थान, आरोपियों का विवरण और उपलब्ध साक्ष्य स्पष्ट रूप से बताना जरूरी होता है।

एफआईआर दर्ज होना नागरिक का कानूनी अधिकार है और पुलिस इसे दर्ज करने से इंकार नहीं कर सकती।

👉FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज कराते समय नीचे दी गई बातों को स्पष्ट बताना चाहिए, ताकि रिपोर्ट मजबूत और सही दर्ज हो सके—

  1. घटना की तारीख और समय
    घटना किस दिन और लगभग किस समय हुई, यह साफ-साफ बताएं।
  2. घटना का स्थान
    घटना कहां हुई—गांव/शहर का नाम, थाना क्षेत्र, गली, मकान नंबर या कोई पहचान योग्य स्थान।
  3. शिकायतकर्ता का विवरण
    आपका पूरा नाम, पिता/पति का नाम, उम्र, पता और मोबाइल नंबर।
  4. घटना का पूरा विवरण
    क्या हुआ, कैसे हुआ, किस क्रम में हुआ—पूरी घटना सरल और स्पष्ट शब्दों में।
  5. आरोपी का विवरण (यदि ज्ञात हो)
    आरोपी का नाम, पता, हुलिया, उम्र, पहचान से जुड़ी कोई भी जानकारी।
    यदि नाम न पता हो तो “अज्ञात व्यक्ति” लिखवाएं।
  6. घटना का कारण (यदि पता हो)
    घटना क्यों हुई—पुरानी रंजिश, लेन-देन, विवाद या कोई अन्य वजह।
  7. नुकसान का विवरण
    जान-माल की हानि, चोरी गया सामान, जला हुआ सामान, घायल व्यक्ति आदि का विवरण।
  8. चोट या चिकित्सकीय जानकारी
    यदि किसी को चोट लगी है तो किसे, कैसी चोट, कहां इलाज कराया गया।
  9. गवाहों की जानकारी
    घटना देखने या जानने वाले व्यक्तियों के नाम, पते और मोबाइल नंबर (यदि हों)।
  10. साक्ष्य (सबूत)
    फोटो, वीडियो, कॉल रिकॉर्ड, चैट, दस्तावेज या कोई अन्य सबूत उपलब्ध हो तो उसका जिक्र।
  11. पूर्व में दी गई सूचना (यदि कोई हो)
    पहले थाने या किसी अधिकारी को मौखिक/लिखित सूचना दी हो तो बताएं।
  12. स्पष्ट मांग
    आरोपी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग।
  13. हस्ताक्षर/अंगूठा निशान
    FIR पढ़कर सही पाए जाने पर हस्ताक्षर या अंगूठा निशान अवश्य करें।

👉 महत्वपूर्ण बात:
FIR की एक कॉपी मुफ्त में लेना आपका अधिकार है, इसे जरूर लें।

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