नाबालिग को धन और IPhone का लालच दे अवैध रूप अंडाणु निकाला ……

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नाबालिग से अवैध अंडाणु निष्कर्षण का मामला उजागर, फर्जी दस्तावेजों के सहारे IVF सेंटर तक पहुंचाया गया

प्रयागराज, 08 फरवरी 2026.
प्रयागराज के फाफामऊ इलाके से सामने आया है |

प्राप्त जानकारी के अनुसार एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को पैसों और iphone का लालच देकर, उसकी पहचान बदलकर और उसे विवाहित दिखाते हुए IVF सेंटर तक ले जाया गया, जहां उससे अवैध रूप से अंडाणु निकलवाया गया। जांच आगे बढ़ने पर पलक, रिंकी, सीमा, हिमांशु और कल्पना के नाम सामने आए हैं और एक संगठित नेटवर्क पुलिस के रडार पर आ गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक मामले की शुरुआत तब हुई जब नाबालिग की मां ने फाफामऊ थाने में शिकायत दर्ज कराई। मां के अनुसार, पड़ोस में रहने वाली पलक और उसकी मां रिंकी उनकी बेटी को काम दिलाने के बहाने अपने साथ ले गईं और कुछ पैसों का लालच दिया गया। इसके बाद लड़की के व्यवहार में बदलाव आने लगा। वह अक्सर बिना बताए घर से बाहर रहने लगी और सवाल पूछने पर टालमटोल करने लगी। कुछ समय बाद वह लापता हो गई।

परिवार की तलाश के दौरान पता चला कि लड़की किसी IVF सेंटर से जुड़ी मेडिकल प्रक्रिया में शामिल है। 3 फरवरी को उसे वन स्टॉप सेंटर भेजा गया, जहां चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने उसका बयान दर्ज हुआ। यहीं पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं। नाबालिग ने बताया कि वह पलक के साथ एक IVF सेंटर गई थी और वहां उसका ओवा एक्सट्रैक्शन कराया गया।

पुलिस के अनुसार, लड़की को पैसों और आईफोन का लालच दिया गया था। उसे यह कहकर भरोसा दिलाया गया कि यह एक सामान्य मेडिकल डोनेशन है और इसमें कोई जोखिम या कानूनी परेशानी नहीं है। उसे न तो प्रक्रिया की गंभीरता बताई गई और न ही यह स्पष्ट किया गया कि नाबालिग होने के कारण यह पूरी तरह अवैध है।

जांच में सामने आया कि नाबालिग होने के चलते सीधे IVF प्रक्रिया संभव नहीं थी, इसलिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया। पुलिस के मुताबिक, सीमा नाम की महिला के यहां लड़की को ले जाया गया। सीमा के बेटे हिमांशु ने फर्जी आधार कार्ड तैयार किया, जिसमें लड़की की उम्र बालिग दर्शाई गई और उसे विवाहित बताया गया। इसके बाद उसे IVF सेंटर की एक रजिस्टर्ड एजेंट कल्पना के पास ले जाया गया, जहां फर्जी कंसेंट एफिडेविट तैयार किया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर 20 जनवरी को IVF सेंटर में अंडाणु निकालने की प्रक्रिया कराई गई।

डीसीपी गंगानगर जोन कुलदीप सिंह गुनावत ने बताया कि नाबालिग की मां की शिकायत और पीड़िता के बयान के आधार पर केस दर्ज किया गया है। पूछताछ के दौरान यह पता चला कि लड़की पहले पलक के साथ शादी-ब्याह आयोजनों में वेट्रेस का काम करती थी। इसी दौरान संपर्क बना और उसकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसे डोनर बनकर जल्दी पैसा कमाने का झांसा दिया गया।

पुलिस ने अब तक पलक, रिंकी, सीमा, हिमांशु और कल्पना को हिरासत में ले लिया है। सभी से पूछताछ जारी है। फर्जी दस्तावेजों, डिजिटल डिवाइस और IVF सेंटर से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या IVF डोनर के नाम पर एजेंटों का कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है, क्योंकि बिना नेटवर्क के इतने व्यवस्थित तरीके से फर्जी कागजात तैयार होना और मेडिकल प्रक्रिया पूरी होना मुश्किल माना जा रहा है।

पुलिस के मुताबिक, नाबालिग की काउंसलिंग जारी है। उसकी मेडिकल जांच कराई जा रही है और मनोवैज्ञानिक सहायता भी दी जा रही है। पूरा मामला चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की निगरानी में है।

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