Gyan Prakash Dubey NGV PRAKASH NEWS

अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर: पेट्रोल और एलपीजी की किल्लत से लोगों की बढ़ी परेशानी
बस्ती 09 मार्च 2026.
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत के ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पर दबाव के चलते कई जगहों पर पेट्रोल और घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। 📍💥📍हालात यह हैं कि कई इलाकों में लोगों को पेट्रोल के लिए एक पेट्रोल पंप से दूसरे पेट्रोल पंप तक भटकना पड़ रहा है, जबकि घरेलू गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लगने के बावजूद उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
📍📍पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार कई स्थानों पर पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति समय पर नहीं पहुंच पा रही है, जिसके कारण अधिकांश पंपों पर स्टॉक खत्म हो गया है। कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों पर ही सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध है, जहां सुबह से ही लंबी कतारें लग जा रही हैं। कई वाहन चालक घंटों इंतजार करने के बाद भी पेट्रोल नहीं मिलने से मायूस लौट रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ जगहों पर वाहन चालकों को अपनी गाड़ियों को धक्का देकर पैदल ले जाने तक की नौबत आ गई है।
💥ईंधन संकट के साथ-साथ घरेलू एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को किलोमीटर तक कतार में खड़ा होना पड़ रहा है, लेकिन शाम तक गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अनेक घरों में खाना तक नहीं बन पा रहा है और लोग वैकल्पिक व्यवस्थाओं का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं।
➡️लोगों का कहना है कि सरकार की ओर से आपूर्ति सामान्य होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों पर लगातार बढ़ती भीड़ और खाली स्टॉक सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
📍सबसे ज्यादा परेशानी उन उपभोक्ताओं को हो रही है जिनके घर एजेंसी पर जाकर गैस लाने वाला कोई नहीं है और वह हांकर द्वारा गैस मंगवाते हैं |
यहां बताते चले की गैस एजेंसियाँ कुछ सिलेंडर जो वितरित कर रही है वह सीधे उपभोक्ताओं को दे रही है जिसके कारण उन्हें परेशानी का सामना सबसे ज्यादा करना पड़ रहा है |
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ेगा। फिलहाल सरकार और तेल कंपनियां स्थिति को सामान्य बनाए रखने के प्रयास में जुटी हैं, लेकिन आम जनता को राहत मिलने में अभी समय लग सकता है।
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