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मदुरई (तमिलनाडु), 19 मार्च 2026 — पत्नी के किसी अन्य व्यक्ति के साथ चले जाने के मामले में दायर याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट की मदुरई बेंच ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई महिला अपनी इच्छा से घर छोड़कर गई है, तो उसे वापस लाने के लिए हेबियस कॉर्पस याचिका का उपयोग नहीं किया जा सकता।
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मामला उस समय सामने आया जब एस मुरुगन नाम के व्यक्ति ने अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दाखिल करते हुए आरोप लगाया कि 6 मार्च 2026 से उसकी पत्नी और दो बच्चे लापता हैं। उसने अदालत से मांग की कि उसकी पत्नी और बच्चों को अदालत के सामने पेश किया जाए और उन्हें वापस दिलाया जाए। इस संबंध में 7 मार्च 2026 को गुमशुदगी की एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि संबंधित महिला किसी दबाव या अवैध हिरासत में नहीं है, बल्कि वह अपनी इच्छा से एक अन्य व्यक्ति के साथ गई है और अपने बच्चों को भी साथ ले गई है। इस दलील पर कोर्ट ने गंभीरता से विचार किया।
जस्टिस ए आनंद वेंकटेश और जस्टिस पी धनबल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि हेबियस कॉर्पस याचिका का उद्देश्य केवल उन मामलों में हस्तक्षेप करना है, जहां किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया हो। यदि कोई वयस्क महिला अपनी मर्जी से कहीं जाती है, तो उसे जबरन वापस लाने के लिए इस कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि “यदि पत्नी स्वयं किसी अन्य व्यक्ति के साथ जाने का निर्णय लेती है, तो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के तहत अदालत ज्यादा कुछ नहीं कर सकती।” साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पति को संबंधित पारिवारिक या सिविल अदालत में अन्य कानूनी उपाय अपनाने चाहिए।
हालांकि, अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया कि महिला और बच्चों का पता लगाया जाए और उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सुरक्षित हैं और किसी दबाव में नहीं हैं।
इस फैसले को वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी दृष्टांत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता और कानून के दायरे को स्पष्ट किया गया है।
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