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अचानक गिरने लगे गिद्ध……..
लखीमपुर खीरी, 08 अप्रैल 2026.
प्राप्त जानकारी के अनुसार बिजुआ क्षेत्र स्थित भीरा वन रेंज के पड़रिया बीट में इंसानी लापरवाही ने प्रकृति के संतुलन को गहरा आघात पहुंचाया है। सेमरिया गांव के पास एक खेत में जहरीला मांस खाने से करीब 28 गिद्धों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई, जबकि कई अन्य गिद्ध गंभीर हालत में इधर-उधर गिरते पाए गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह खेत में मरे हुए कुत्ते के शव पर गिद्धों का झुंड मंडराता दिखा, जिसे देखकर ग्रामीणों में उत्सुकता थी और कुछ लोग इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद कर रहे थे। लेकिन कुछ ही देर में हालात भयावह हो गए, जब एक-एक कर गिद्ध बेहोश होकर जमीन पर गिरने लगे और देखते ही देखते पूरा क्षेत्र मौत के मंजर में बदल गया। इस घटना ने वहां मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पास के गांव में आवारा कुत्तों को जहर दिया गया था। उन्हीं में से एक कुत्ता खेत के पास आकर मर गया, जिसे खाने पहुंचे गिद्ध जहरीले प्रभाव की चपेट में आ गए। इसका परिणाम यह हुआ कि एक साथ बड़ी संख्या में गिद्धों की मौत हो गई।
गिद्धों को ‘प्रकृति का सफाईकर्मी’ माना जाता है, जो पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनकी इस तरह मौत होना न केवल पारिस्थितिकी संतुलन के लिए खतरे की घंटी है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों और प्रकृति प्रेमियों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते तो कई गिद्धों की जान बचाई जा सकती थी।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मृत गिद्धों को एकत्र कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक जहरखुरानी के कारण वन्यजीवों की इस तरह मौत होती रहेगी और जिम्मेदार विभाग केवल औपचारिकताओं तक सीमित रहेंगे।
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