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हेड कॉन्स्टेबल रेवती की गवाही से 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा
तमिलनाडु, 09 अप्रैल 2026.
वर्ष 2020 में सथानकुलम पुलिस स्टेशन में हुई कस्टोडियल मौत के चर्चित मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 9 पुलिसकर्मियों को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है। इस मामले में हेड कॉन्स्टेबल रेवती की साहसिक गवाही निर्णायक साबित हुई, जिसने पूरे केस को एक अहम मोड़ दिया।
घटना 2020 की है, जब पी जयराज और उनके बेटे जे बेनिक्स को कोविड नियमों के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि पुलिस स्टेशन के अंदर दोनों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
हेड कॉन्स्टेबल रेवती उस रात ड्यूटी पर मौजूद थीं। उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने जो बयान दिया, वह इस केस का सबसे मजबूत आधार बना। रेवती ने बिना किसी डर के पुलिस स्टेशन के अंदर हुई हर गतिविधि, मारपीट और क्रूरता का विस्तृत विवरण पेश किया। उन्होंने बताया कि किस तरह दोनों पीड़ितों को बुरी तरह पीटा गया, उनके शरीर के संवेदनशील हिस्सों पर भी हमला किया गया और हालत बिगड़ने के बाद भी उन्हें राहत नहीं दी गई।
रेवती के अनुसार, आरोपी पुलिसकर्मी मारपीट के बीच-बीच में शराब पीते रहे और फिर दोबारा हिंसा करते थे। उन्होंने यह भी बताया कि घायल अवस्था में भी पीड़ितों से ही खून साफ करवाया गया। इस बयान ने न केवल घटना की भयावहता को उजागर किया बल्कि आरोपियों की भूमिका भी स्पष्ट कर दी।
इस दौरान रेवती को भारी दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा। साथी पुलिसकर्मियों ने उन्हें चुप रहने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने सच्चाई के साथ खड़े रहने का फैसला किया। बयान दर्ज कराने के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे, क्योंकि पुलिसकर्मी बाहर इकट्ठा होकर माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। बाद में रेवती और उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की गई।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला केवल दो लोगों की हत्या का नहीं, बल्कि कानून और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का है। रेवती की ईमानदार और निर्भीक गवाही के आधार पर अदालत ने सभी 9 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई।
यह फैसला न केवल न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि कानून के रक्षक यदि कानून तोड़ते हैं, तो उन्हें भी कठोर सजा से नहीं बचाया जा सकता।
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