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सोनम रघुवंशी और उसका भाई गोविन्द-फाइल फोटो
📍राजा रघुवंशी हत्याकांड: मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत, भाई ने कहा— “उसे कभी घर नहीं लाएंगे”
29 अप्रैल 26.
मेघालय के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को शिलॉन्ग कोर्ट से सशर्त जमानत मिल गई है। अदालत ने सोनम को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों के आधार पर राहत दी है।
, 📍कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि सोनम को फिलहाल मेघालय में ही रहना होगा और नियमित रूप से स्थानीय थाने में हाजिरी देनी होगी। इसके अलावा हर सुनवाई में अदालत में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। गवाहों या सबूतों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करने और अदालत की अनुमति के बिना क्षेत्र छोड़ने पर भी रोक लगाई गई है।
भाई गोविंद ने किया किनारा
सोनम को जमानत मिलने के बाद उनके भाई गोविंद रघुवंशी ने दो टूक शब्दों में कहा कि परिवार का अब उससे कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे यह केस नहीं लड़ रहे हैं और सोनम को सरकारी वकील उपलब्ध कराया गया है।
गोविंद ने कहा,
“सोनम से हमारे परिवार का अब कोई लेना-देना नहीं है। हम उसे कभी अपने इंदौर स्थित घर नहीं लाएंगे।”
इस बयान के बाद मामले ने नया भावनात्मक मोड़ ले लिया है।
गिरफ्तारी प्रक्रिया पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने सोनम को यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया कि उन्हें किन आरोपों में गिरफ्तार किया जा रहा है। कोर्ट ने पाया कि पुलिस द्वारा दिए गए “ग्राउंड ऑफ अरेस्ट” दस्तावेज में कई गंभीर खामियां थीं।
यहां तक कि हत्या से जुड़ी मुख्य धारा का भी सही उल्लेख नहीं किया गया था, जिसे अदालत ने गंभीर प्रक्रिया संबंधी त्रुटि माना।
“गिरफ्तारी का कारण बताना संवैधानिक अधिकार”
कोर्ट ने कहा कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट रूप से बताना उसका संवैधानिक अधिकार है। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो गिरफ्तारी की वैधानिकता कमजोर हो जाती है।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कानून केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उसकी सही प्रक्रिया का भी पालन चाहता है।
10 महीने जेल, लेकिन केवल 4 गवाहों के बयान
सोनम करीब 10 महीने से जेल में थीं। मामले में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, लेकिन अब तक 90 गवाहों में से केवल 4 के ही बयान दर्ज हो पाए हैं।
बाद में सप्लीमेंट्री चार्जशीट और नए आरोपियों के जुड़ने से ट्रायल और धीमा हो गया। कोर्ट ने माना कि ट्रायल में देरी आरोपी की वजह से नहीं हुई, इसलिए उसे अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता।
सरकारी वकील की दलील खारिज
सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि गिरफ्तारी में हुई कमी केवल तकनीकी थी और सोनम को आरोपों की पूरी जानकारी थी। लेकिन अदालत ने इस दलील को अस्वीकार कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि न्याय का मूल आधार है।
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