सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को दी संवैधानिक मान्यता…….

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सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को दी संवैधानिक मान्यता, चुनाव आयोग को बड़ी राहत

नई दिल्ली, 27 मई 2026.

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में चल रही विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने साफ कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है और SIR प्रक्रिया उसी दिशा में उठाया गया कदम है।

फैसला सुनाते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि बिहार में चल रही SIR प्रक्रिया संविधान के उस मूल उद्देश्य से जुड़ी है, जिसका संबंध स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने से है। अदालत ने माना कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाने के लिए इस तरह की प्रक्रिया चलाने का अधिकार प्राप्त है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तीन प्रमुख सवालों पर विचार किया। पहला, क्या चुनाव आयोग को SIR कराने का अधिकार है। दूसरा, क्या यह प्रक्रिया किसी वैध उद्देश्य पर आधारित है। और तीसरा, क्या इसके तहत अपनाए गए उपाय कानून के अनुरूप और संतुलित हैं।

अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21(3) चुनाव आयोग को विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण कराने का अधिकार देते हैं। कोर्ट ने माना कि बिहार में बड़े पैमाने पर जनसंख्या परिवर्तन, शहरीकरण और प्रवासन के चलते मतदाता सूची में व्यापक बदलाव हुए हैं, जिसके कारण यह प्रक्रिया शुरू की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की अखंडता बनाए रखना और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। इसी संवैधानिक जिम्मेदारी के तहत आयोग ने बिहार से इस विशेष पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत की।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि इतने बड़े स्तर पर SIR प्रक्रिया चलाना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के खिलाफ है और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि अदालत ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया कानून के दायरे में है और उसका उद्देश्य पूरी तरह वैध है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कराए गए मतदाता सूची सुधार अभियान पर चुनाव आयोग की बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। साथ ही यह निर्णय भविष्य में देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

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