देश में मानसून की धमाकेदार एंट्री: कब पहुंचेगा यू पी में,आईएमडी नें बताया …….

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मानसून ने केरल में दी दस्तक, यूपी-बिहार में जल्द पहुंचने की उम्मीद

नई दिल्ली, 04 जून 2026.

देशभर में भीषण गर्मी और उमस के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आधिकारिक तौर पर केरल में प्रवेश कर लिया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि 4 जून से 9 जून के बीच केरल के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके मद्देनजर तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम और त्रिशूर सहित कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग के अनुसार मानसून के आगमन के साथ ही केरल में मौसम का मिजाज बदल गया है। कई जिलों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है, जिससे तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है। विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ क्षेत्रों में 7 से 20 सेंटीमीटर तक वर्षा हो सकती है, जिससे जलभराव और जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अब मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से पर्याप्त नमी मिलने के कारण मानसून आगामी दिनों में तेजी से देश के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ेगा। पिछले कुछ दिनों में इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई थी, लेकिन अब मौसमीय परिस्थितियों में सुधार होने से इसकी प्रगति तेज होने की उम्मीद है।

📍आईएमडी के अनुमान के अनुसार बिहार में मानसून 12 से 15 जून के बीच पहुंच सकता है। इसके बाद पूरे राज्य में इसके सक्रिय होने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। वहीं 👉📍उत्तर प्रदेश में मानसून चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसके 15 से 20 जून के बीच पहुंचने की संभावना है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 20 से 25 जून के बीच मानसून दस्तक दे सकता है।

मौसम विभाग ने केरल के अलावा देश के कई अन्य राज्यों में भी गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट जारी किया है। अनुमान है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून का अच्छा प्रदर्शन कृषि क्षेत्र और देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और लगभग आधी कृषि भूमि वर्षा आधारित है। ऐसे में समय पर और पर्याप्त बारिश किसानों के लिए राहत और बेहतर उत्पादन की उम्मीद लेकर आई है।

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